पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा असर अब ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ रहा है, खास तौर पर Hyundai Motor जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए।
कंपनी ने खुद यह कन्फर्म किया है कि इस क्षेत्र के ज़रूरी शिपिंग रूट्स (Shipping Routes) के प्रभावित होने से उनके यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों में जाने वाले वाहनों की शिपमेंट (Shipment) रुक गई है। इसके चलते शिपिंग की लागतों (Shipping Costs) में भारी इज़ाफ़ा हुआ है और डिलीवरी का समय लंबा हो गया है। Hyundai Motor का मानना है कि सप्लाई चेन (Supply Chain) से जुड़ी ये दिक्कतें संघर्ष खत्म होने के काफी समय बाद तक भी बनी रह सकती हैं।
Hyundai Motor के एक एग्जीक्यूटिव (Executive) ने चिंता जताई है कि संघर्ष खत्म होने के बाद भी सप्लाई चेन को दोबारा से तैयार करने में काफी समय लगेगा। कच्चा माल (Raw Materials) और शिपिंग की बढ़ती लागत ऑटो पार्ट्स सप्लायर्स (Suppliers) के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है, जिससे प्रोडक्शन (Production) पर भी असर पड़ रहा है। कंपनी की लॉजिस्टिक्स यूनिट Hyundai Glovis फिलहाल पश्चिम एशिया के कुछ रूट्स का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है, जिससे माल को दूसरे रास्ते से भेजना पड़ रहा है और सुरक्षित होने तक उसे स्टोर करके रखना पड़ रहा है।
भले ही मार्च 2026 में दक्षिण कोरिया के कुल एक्सपोर्ट (Exports) ने 48.3% की जोरदार छलांग लगाकर $86.13 बिलियन का रिकॉर्ड बनाया हो, लेकिन पश्चिम एशिया को होने वाले शिपमेंट में 49% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस स्थिति से निपटने के लिए, शिपमेंट को श्रीलंका जैसे हब से डायवर्ट किया जा रहा है। इस सबके बीच, Hyundai Motor की ग्लोबल सेल्स (Global Sales) मार्च 2026 में 2.3% घटकर 358,759 यूनिट्स पर आ गई। इस बिक्री में गिरावट का असर शुक्रवार को शेयर बाजार पर भी दिखा, जहां Hyundai Motor का स्टॉक 1.2% नीचे बंद हुआ, जबकि KOSPI इंडेक्स 2.7% चढ़ा था।
विश्लेषकों (Analysts) की राय Hyundai Motor पर पॉजिटिव बनी हुई है, जिसमें टारगेट प्राइस (Target Price) में 31% तक की बढ़त का अनुमान है। लेकिन पश्चिम एशिया का यह संघर्ष उनके अनुमानों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है। यह संघर्ष Hyundai Motor के लिए बड़े रिस्क (Risk) लेकर आया है। लंबी देरी का मतलब है माल भाड़े (Freight) और इंश्योरेंस (Insurance) की लागत में बढ़ोतरी, जो ऑटो कंपनियों के मार्जिन (Margin) को और कम कर सकती है। कंपोनेंट (Component) की डिलीवरी में देरी प्रोडक्शन को रोक सकती है, जिससे रेवेन्यू (Revenue) और मुनाफे (Profit) पर सीधा असर पड़ेगा।