West Asia का संघर्ष भारतीय एयरलाइंस के लिए बना सिरदर्द
West Asia में बढ़ते तनाव की वजह से भारतीय एयरलाइंस पर भारी आर्थिक दबाव आ गया है। कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने और प्रतिबंधों के चलते एयरलाइंस को लंबे और महंगे रूट अपनाने पड़ रहे हैं। इस वजह से ग्लोबल एयरलाइंस को पहले ही अनुमानित 53 अरब डॉलर का घाटा हो चुका है।
लंबे रूट और बढ़ता खर्च
भारतीय एयरलाइंस इस समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रही हैं। प्रभावित रूट्स पर परिचालन (operational) लागत हर तिमाही 30% तक बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, Air India की दिल्ली-लंदन की फ्लाइट, जो पहले 8 घंटे में पूरी होती थी, अब 12 घंटे से ज्यादा का समय ले रही है। वहीं, मुंबई-न्यूयॉर्क रूट अब रोम में रुककर पूरा होने में करीब 21 घंटे तक खिंच गया है। इन लंबे सफर से उन्हें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र पर लगे बैन के कारण पहले से हो रहे नुकसान में और बढ़ोतरी हो रही है।
IndiGo को खास तौर पर अपने लीज पर लिए बोइंग ड्रीमलाइनर (Boeing Dreamliners) विमानों को लेकर परेशानी हो रही है, जिनका रजिस्ट्रेशन यूरोप में है। West Asia के कई देशों के ऊपर से उड़ान भरने की सख्त मनाही के कारण IndiGo को अफ्रीका के ऊपर से और भी लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं।
उड़ानें रद्द, फ्यूल सरचार्ज बढ़ा
इन दिक्कतों के चलते कई उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं। Air India ने खाड़ी देशों के लिए लगभग 2,500 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं और वहां सामान्य शेड्यूल का केवल 30% ही ऑपरेट कर पा रही है। IndiGo ने दोहा, कुवैत और शारजाह जैसे शहरों के लिए 28 मार्च तक अपनी सेवाएं रोक दी हैं।
एयरलाइन के बजट का 35-45% हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) होता है, जिसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। जेट फ्यूल की बढ़ी कीमतों के कारण IndiGo और Akasa Air ने टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज (fuel surcharge) लगा दिया है। IndiGo के लिए यह ₹425 से ₹2,300 प्रति सेक्टर तक है, जबकि Akasa Air के लिए ₹199 से ₹1,300 तक है। इससे सीधे तौर पर यात्रियों की टिकट की लागत बढ़ गई है। केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने भी चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल से फ्यूल की बढ़ी कीमतों के कारण लागत में और बढ़ोतरी हो सकती है।