Welspun Enterprises ने महाराष्ट्र सरकार के साथ ₹7,300 करोड़ का एक बड़ा एग्रीमेंट फाइनल किया है। इस डील के तहत कंपनी 53.4 किलोमीटर लंबा छह-लेन का हाईवे बनाएगी। यह प्रोजेक्ट 'टोल मॉडल' के तहत 29 साल के लिए दिया गया है, जिससे कंपनी के ऑर्डर बुक को और मजबूती मिली है।
महाराष्ट्र में ₹7,300 करोड़ की नई सड़क परियोजना
Welspun Enterprises ने अपनी सहायक कंपनी, Welspun Pune Shirur Projects Ltd. के ज़रिए महाराष्ट्र में एक अहम हाईवे कॉरिडोर विकसित करने के लिए एक सब-कंसैशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रोजेक्ट में NH-753F के पुणे-शिरूर सेक्शन पर 53.4 किलोमीटर लंबी छह-लेन की सड़क का निर्माण शामिल है। यह डील महाराष्ट्र स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MSIDC) और राज्य सरकार के साथ हुई है, और यह अप्रैल 2026 में मिली शुरुआती लेटर ऑफ अवार्ड के बाद फाइनल हुई है।
प्रोजेक्ट का मॉडल और समय-सीमा
यह प्रोजेक्ट 'डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर' (DBFOT) मॉडल पर आधारित है, जिसे आम बोलचाल में 'टोल मॉडल' भी कहा जाता है। इस मॉडल के तहत, Welspun Enterprises सड़क की फंडिंग और निर्माण के लिए ज़िम्मेदार होगी, और लंबी अवधि तक टोल वसूल कर राजस्व कमाएगी। इस प्रोजेक्ट की कुल कंसैशन अवधि 29 साल है, जिसमें से 4 साल निर्माण के लिए निर्धारित हैं। कंपनी को आने वाले सालों में कैपिटल स्पेंडिंग (पूंजीगत खर्च) को सावधानी से मैनेज करना होगा ताकि प्रोजेक्ट समय पर और बिना किसी अतिरिक्त कर्ज के पूरा हो सके।
मजबूत ऑर्डर बुक और पिछली तिमाही के नतीजे
इस नए प्रोजेक्ट से Welspun Enterprises की कंसॉलिडेटेड ऑर्डर बुक में करीब ₹20,000 करोड़ का इजाफा हुआ है, जिसमें ऑपरेशंस और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स से लगभग ₹5,000 करोड़ शामिल हैं। यह तब हुआ है जब कंपनी ने मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही में ₹145.2 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो पिछले साल के मुकाबले 44.8% ज़्यादा था। इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 13.8% बढ़कर ₹1,200 करोड़ और ऑपरेटिंग प्रॉफिट 29.2% बढ़कर ₹239.3 करोड़ हो गया था।
निवेशकों को किन बातों पर नज़र रखनी चाहिए?
हालांकि यह एक बड़ी डील है, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इस नए प्रोजेक्ट के लिए कैपिटल स्पेंडिंग को अपने मौजूदा पोर्टफोलियो के साथ कैसे संतुलित करती है। टोल मॉडल वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी शुरुआती निवेश की ज़रूरत होती है, और कुशलता से काम पूरा करना मुनाफे के लिए बहुत ज़रूरी है। कंपनी की 4 साल की निर्माण समय-सीमा का पालन करने की क्षमता और लागत में वृद्धि न होने देना मुख्य फोकस रहेगा। इसके अलावा, यह कंपनी कैपिटल-इंटेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, इसलिए लंबे समय तक वित्तीय सेहत का आकलन करने के लिए कर्ज के स्तर और कैश फ्लो पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। बता दें कि 13 जुलाई 2026 को कंपनी के शेयर NSE पर ₹615 पर बंद हुए थे।
