IIT-Madras के स्टार्टअप Waterfly Technologies ने अपने इलेक्ट्रिक 'विंग-इन-ग्राउंड' (WIG) क्राफ्ट के ओशन ट्रायल्स का ऐलान किया है। कंपनी दिसंबर 2026 तक चेन्नई और पुडुचेरी के बीच परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रही है। ध्यान दें, यह एक प्राइवेट कंपनी है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।
'हमिंगबर्ड' का समुद्री सफर
बेंगलुरु स्थित एरोस्पेस स्टार्टअप Waterfly Technologies अपने इलेक्ट्रिक 'हमिंगबर्ड' क्राफ्ट को लेकर आगे बढ़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य 300 किलोग्राम वजनी इस वेसल को समुद्र की लहरों पर टेस्ट करना है। इससे पहले कंपनी ने कावेरीपक्कम झील में शुरुआती टेस्ट पूरे किए हैं। यह क्राफ्ट 'ग्राउंड इफेक्ट' तकनीक पर आधारित है, जो पानी की सतह के ठीक ऊपर उड़कर ड्रैग को कम करता है और एनर्जी एफिशिएंसी को बढ़ाता है।
कमर्शियल लक्ष्य और लागत
कंपनी ने अपना फोकस पैसेंजर ट्रैवल के बजाय कोस्टल कार्गो और ऑफशोर ऑयल फील्ड ट्रांसपोर्ट पर रखा है। स्टार्टअप का दावा है कि इसकी ऑपरेटिंग कॉस्ट ₹10 प्रति टन-किलोमीटर से कम रहने की उम्मीद है, जो पारंपरिक समुद्री शिपिंग को सीधी चुनौती दे सकती है। श्रीपेरंबुदूर स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कंपनी फिलहाल 2 क्राफ्ट प्रति सप्ताह बनाने की क्षमता रखती है।
निवेशकों के लिए जरूरी चेतावनी
निवेशकों को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि Waterfly Technologies एक प्राइवेट, सीड-स्टेज स्टार्टअप है। यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर उपलब्ध नहीं है। बाजार में कई बार लोग इसका संबंध 'Waterbase Ltd' जैसी लिस्टेड कंपनियों से जोड़ लेते हैं, जिसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी ने अब तक लगभग $2,50,000 की सीड फंडिंग जुटाई है।
बड़ी चुनौतियां
प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी Bureau Veritas जैसी संस्थाओं से समुद्री नियामक मंजूरी (Regulatory Compliance) कैसे हासिल करती है। बिना सर्टिफिकेशन और ओशन-टेस्टिंग के इस प्रोजेक्ट में तकनीकी जोखिम बना हुआ है। भविष्य में कंपनी का लक्ष्य बड़े शिपिंग कंटेनर्स ले जाने वाला वेसल तैयार करना है, लेकिन फिलहाल यह एक हाई-रिस्क R&D चरण में है।
