Vizhinjam Port का लक्ष्य भारत के **$22 करोड़** के विदेशी मुद्रा (Forex) आउटफ्लो को कम करना है। हालांकि, पोर्ट को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए सड़क और रेल कनेक्टिविटी की भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही आसपास जमीन की बढ़ती कीमतों ने नए निवेश पर ब्रेक लगा दिया है।
Adani Ports and Special Economic Zone द्वारा संचालित विझिनजाम इंटरनेशनल सीपोर्ट ने अपने पहले 18 महीनों में 20 लाख TEUs हैंडल करने का बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। पोर्ट की 20-मीटर नेचुरल ड्राफ्ट क्षमता इसे दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को डॉक करने में सक्षम बनाती है। इससे भारत की कोलंबो, सिंगापुर और जेबेल अली जैसे विदेशी हब पर निर्भरता कम हो सकती है, जिससे एक्सपोर्टर्स को प्रति कंटेनर $80 से $100 की बचत हो सकती है।
बुनियादी ढांचे का संकट
पोर्ट की सफलता केवल जहाजों को हैंडल करने में नहीं, बल्कि माल को देश के भीतरी इलाकों तक पहुंचाने में है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए कंटेनर फ्रेट स्टेशनों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का एक मजबूत नेटवर्क जरूरी है। फिलहाल, पोर्ट से माल की आवाजाही के लिए सड़क और रेल कनेक्टिविटी की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। 65-किमी लंबी आउटर रिंग रोड का निर्माण इस पोर्ट के भविष्य के लिए लाइफलाइन की तरह है।
जमीन की कीमतों में बेतहाशा उछाल
पोर्ट के आसपास रियल एस्टेट की कीमतों में आया उछाल भी एक बड़ा चिंता का विषय है। जमीन की कीमतें ₹25,000 प्रति सेंट से बढ़कर ₹15 लाख प्रति सेंट तक पहुंच गई हैं। यह अत्यधिक महंगी जमीन मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग कंपनियों के लिए एक बैरियर बन गई है, जो पोर्ट के पास अपनी यूनिट्स लगाना चाहती हैं।
आगे की राह
मुंद्रा या JNPT जैसे स्थापित पोर्ट्स के मुकाबले, विझिनजाम को अभी अपने मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को विकसित करने में लंबा सफर तय करना है। निवेशकों की नजर अब राज्य सरकार के रोड प्रोजेक्ट्स और नए लॉजिस्टिक्स पार्कों पर होगी। यदि कनेक्टिविटी की समस्या जल्द दूर नहीं हुई, तो पोर्ट की ग्रोथ और डोमेस्टिक मार्केट तक सामान पहुंचाने की क्षमता सीमित रह सकती है।
