केंद्रीय बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (Visakhapatnam Port Authority) के लिए ₹334.89 करोड़ के आंतरिक फ्लाईओवर को मंज़ूरी दे दी है। यह **3.584** किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम को खत्म करेगा, जिससे कार्गो की निकासी तेज़ होगी और परिचालन लागत कम होगी।
पोर्ट पर जाम से मिलेगी मुक्ति
मंत्रालय ने विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी में एक ₹334.89 करोड़ का नया आंतरिक फ्लाईओवर बनाने के लिए हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत 3.584 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह कॉन्वेंट जंक्शन (Convent Junction) को सीधे पोर्ट के डॉक एरिया से जोड़ेगा। खास बात यह है कि यह रोड और रेल ट्रैफिक को पूरी तरह अलग कर देगा।
क्यों ज़रूरी है यह प्रोजेक्ट?
पोर्ट पर लंबे समय से लॉजिस्टिक्स की एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। फिलहाल, पोर्ट के कामकाज में नौ बड़ी रेलवे क्रॉसिंग के कारण बार-बार रुकावट आती है। दिन में करीब 18 बार इन क्रॉसिंग पर ट्रैफिक रुक जाता है। इस वजह से कार्गो वाले ट्रकों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे फ्यूल की खपत बढ़ती है, परिचालन खर्च बढ़ता है और कार्गो की निकासी में भारी देरी होती है। इस एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से सामान की आवाजाही सुगम होगी और डॉक एरिया से मुख्य रोड तक पहुंचने में कम समय लगेगा।
पोर्ट की रिकॉर्ड परफॉर्मेंस
लॉजिस्टिक्स और पोर्ट सेक्टर के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत अहम है। हाल ही में, विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी ने 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए 91.17 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो की रिकॉर्ड हैंडलिंग की है। जैसे-जैसे पोर्ट से गुजरने वाले कार्गो की मात्रा बढ़ रही है, पोर्ट की अंदरूनी व्यवस्था को बेहतर बनाना ज़रूरी हो गया है, ताकि क्षमता का पूरा उपयोग हो सके और जाम की स्थिति पैदा न हो।
समय-सीमा और चुनौतियां
इस प्रोजेक्ट में सिविल, इलेक्ट्रिकल और यूटिलिटी शिफ्टिंग के सभी काम शामिल हैं। साथ ही, 5 साल का मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भी होगा। सरकार का लक्ष्य है कि निर्माण शुरू होने के 30 महीने के अंदर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाए।
हालांकि, फ्लाईओवर से पोर्ट की एफिशिएंसी बढ़ेगी, लेकिन अगले ढाई साल में सबसे ज़रूरी होगा प्रोजेक्ट का निष्पादन। इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन की टाइमलाइन, लागत का बढ़ना और पोर्ट की रोज़मर्रा की गतिविधियों में कम से कम रुकावट डालना जैसी चुनौतियां आ सकती हैं। अगले कुछ महीनों में पोर्ट अथॉरिटी के लिए सबसे बड़ा पैमाना यही होगा कि क्या वे मौजूदा कार्गो की हाई वॉल्यूम को प्रभावित किए बिना इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर पाते हैं।
