VOC Port Expansion: ₹17,167 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिली संजीवनी, सरकार ने बदली रणनीति

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AuthorMehul Desai|Published at:
VOC Port Expansion: ₹17,167 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिली संजीवनी, सरकार ने बदली रणनीति

V.O. Chidambaranar Port के मेगा एक्सपेंशन प्रोजेक्ट को गति देने के लिए सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। दो साल तक बोली नहीं मिलने के बाद, अब सरकार ने वित्तीय जोखिम कम करने के लिए प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांट दिया है।

तमिलनाडु के V.O. Chidambaranar (VOC) पोर्ट के 'आउटर हार्बर प्रोजेक्ट' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पिछले दो सालों से निवेशकों की सुस्त रुचि के कारण यह प्रोजेक्ट अटका हुआ था, क्योंकि पहले पूरा निवेश एक ही निजी कंपनी पर निर्भर था। अब सरकार ने इस मॉडल को पूरी तरह बदल दिया है।

नई फाइनेंसिंग संरचना (New Financing Structure)

अब इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा कोर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर का है, जैसे ब्रेकवाटर और ड्रेजिंग, जिस पर ₹11,733 करोड़ खर्च होंगे। इसे अब 'हाइब्रिड एन्युटी मॉडल' के तहत सरकार खुद तैयार करेगी। दूसरा हिस्सा टर्मिनल ऑपरेशंस और मैकेनाइजेशन का है, जिसमें ₹5,434 करोड़ का निजी निवेश होगा। इससे प्राइवेट कंपनियों पर कंस्ट्रक्शन का भारी बोझ कम हो जाएगा।

क्षमता और टारगेट (Capacity Goals)

इस बदलाव के साथ ही पोर्ट की क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य भी ऊंचा कर दिया गया है। अब इसकी सालाना क्षमता 5.2 मिलियन TEUs रखने का लक्ष्य है, जो पहले 4 मिलियन TEUs था। यह पोर्ट अब 24,000 TEUs क्षमता वाले बड़े जहाजों को हैंडल करने में सक्षम होगा, जिसके लिए 18 मीटर की गहराई (draft) तैयार की जाएगी।

वित्तीय जोखिम और भविष्य की चुनौतियां

सरकार द्वारा ₹11,733 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च उठाने से पोर्ट अथॉरिटी पर कर्ज का दबाव बढ़ गया है। अब सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह नया मॉडल कितनी जल्दी प्राइवेट प्लेयर्स को टर्मिनल ऑपरेशंस के लिए आकर्षित कर पाता है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बदलाव वाकई में पोर्ट को पूर्वी तट का एक बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब बना पाएगा या नहीं।

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