तेलंगाना के भद्राद्रि कोठागुडेम में प्रस्तावित एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की टेक्निकल टीम **7 सितंबर, 2026** को राज्य का दौरा करेगी। इस विजिट का मुख्य मकसद हवाई अड्डे के लिए एक ऐसी जमीन चुनना है जो एविएशन सेफ्टी के सभी मानकों पर खरी उतरे।
फिर से शुरू हुई कवायद
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Union Civil Aviation Ministry) ने भद्राद्रि कोठागुडेम में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए एक अहम इंस्पेक्शन शेड्यूल किया है। मंत्रालय की टेक्निकल टीम 4 से 5 संभावित लोकेशन का मूल्यांकन करेगी। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले के सभी प्रस्ताव तकनीकी खामियों और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतर पाए थे।
पुरानी चुनौतियां और अड़चनें
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने इससे पहले रामवरम, चंचुपल्ली और सुजाता नगर के पास प्रस्तावित साइटों को खारिज कर दिया था। मुख्य समस्या भौगोलिक स्थिति (Terrain) थी, जैसे आसपास की पहाड़ियां और रेलवे लाइनों की मौजूदगी, जो फ्लाइट ऑपरेशंस के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती हैं। फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी जमीन तलाशना है, जो एविएशन के सख्त सुरक्षा नियमों के दायरे में हो।
रीजनल इकोनॉमी और टूरिज्म के लिए जरूरी
यह प्रोजेक्ट न केवल भद्राचलम के प्रसिद्ध श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मददगार साबित होगा, बल्कि यह क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी गति देगा। अभी यह इलाका पूरी तरह से रोड और रेल नेटवर्क पर निर्भर है। एक एयरपोर्ट बनने से बड़े शहरों के साथ कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
रिस्क फैक्टर और आउटलुक
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि प्रोजेक्ट अभी शुरुआती फिजिबिलिटी फेज में ही है। साइट सिलेक्शन के अलावा, प्रोजेक्ट को फॉरेस्ट लैंड और वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस जैसे बड़े रेगुलेटरी हर्डल्स को भी पार करना होगा। फिलहाल, इस प्रोजेक्ट के लिए कोई आधिकारिक 'इन-प्रिंसिपल' मंजूरी या निर्माण की कोई फिक्स्ड टाइमलाइन नहीं है। 7 सितंबर की रिपोर्ट ही तय करेगी कि यह प्रोजेक्ट भविष्य में हकीकत बनेगा या नहीं।
