Uber ने भारत के प्रमुख शहरों में अपनी प्रीमियम सर्विस 'Uber Black' का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि, कंपनी रेवेन्यू में बढ़त के बावजूद भारी वित्तीय दबाव और तगड़े कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है, जिसके लिए पैरेंट कंपनी को बड़ा निवेश करना पड़ रहा है।
Uber भारत के प्रमुख मेट्रो शहरों में अपनी प्रीमियम मोबिलिटी सर्विस, Uber Black को आक्रामक तरीके से फैला रही है। कंपनी का लक्ष्य उन ग्राहकों को लुभाना है जो लग्जरी SUVs और सेडान के साथ एक पर्सनलाइज्ड, ड्राइवर-युक्त यात्रा का अनुभव चाहते हैं। लंबे अंतराल के बाद, यह सर्विस अब दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में दोबारा शुरू हो चुकी है।
फ्लीट मैनेजमेंट में बदलाव
सर्विस की क्वालिटी मेंटेन करने के लिए Uber अब अपनी कार्यप्रणाली बदल रही है। कंपनी अब केवल व्यक्तिगत ड्राइवरों पर निर्भर रहने के बजाय ऑर्गेनाइज्ड फ्लीट ऑपरेटर्स के साथ हाथ मिला रही है। इसमें Carrum Mobility के साथ पार्टनरशिप भी शामिल है, जिसमें पैरेंट कंपनी ने $1 करोड़ का निवेश किया है। प्रोफेशनल फ्लीट मैनेजर्स के साथ काम करके Uber अब अपनी सर्विस को स्टैंडर्डाइज करना चाहती है।
वित्तीय स्थिति और मार्केट का दबाव
प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करना एक रणनीति है, लेकिन भारत में चुनौतियां बरकरार हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025 में, Uber India ने ₹3,849 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। हालांकि, कंपनी को ₹1,511.6 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जो पिछले साल के ₹89.1 करोड़ के नुकसान से काफी ज्यादा है। अपनी मार्केट पोजीशन को Rapido जैसे प्रतिद्वंद्वियों से बचाने के लिए, पैरेंट कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारतीय बिजनेस में लगभग ₹3,000 करोड़ का फंड इंफ्यूज किया है।
बदलता कॉम्पिटिशन
भारत में राइड-हेलिंग का सेक्टर अब काफी भीड़भाड़ वाला हो गया है। Mahindra Logistics की सर्विस Alyte और बेंगलुरु की स्टार्टअप Shoffr पहले ही हाई-एंड कस्टमर्स के लिए चुनौती पेश कर रही हैं। अब निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Uber भारी कैश इंजेक्शन पर अपनी निर्भरता कम कर पाएगी और प्रीमियम डिमांड को वास्तविक मुनाफे में बदल सकेगी।
