कॉम्पिटिशन की मार: ऑपरेटिंग लॉस में बड़ा इजाफा
वित्तीय वर्ष 2025 में Uber India के परिचालन (Operations) पर गहरा असर पड़ा है। कंपनी के ऑपरेटिंग लॉस (Operating Loss) में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह पिछले साल के ₹84.8 करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹1,052.3 करोड़ हो गया। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी अपने मुख्य राइड-हेलिंग बिजनेस में कमाए हर रुपये पर भारी नुकसान झेल रही है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) भी तेजी से गिरकर -27.3% पर आ गया, जो पिछले साल -2.2% था। यह दिखाता है कि भारत जैसे अहम बाजार में बढ़ते परिचालन खर्च और कड़े कॉम्पिटिशन से कंपनी कितनी जूझ रही है।
नेट लॉस में 16 गुना बढ़ोतरी, मार्जिन पर भारी दबाव
Uber India का कुल नेट लॉस FY25 में चिंताजनक रूप से बढ़कर ₹1,512 करोड़ हो गया, जो FY24 के ₹89 करोड़ के मुकाबले 16 गुना से भी ज्यादा है। इसके चलते नेट मार्जिन (Net Margin) भी बुरी तरह गिरकर -38.8% पर आ गया, जबकि पिछले साल यह -2.3% था। अगर हम कंपनी के कुल रेवेन्यू की बात करें, तो यह 2.3% बढ़कर ₹3,849 करोड़ हो गया, लेकिन राइड-हेलिंग बिजनेस से होने वाली नेट रेवेन्यू में भारी गिरावट आई। यह 89% घटकर सिर्फ ₹88 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹807 करोड़ था। इसकी सबसे बड़ी वजह ड्राइवर्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव्स (Incentives) और डिस्काउंट्स (Discounts) का 33% बढ़कर ₹2,516 करोड़ हो जाना है। कंपनी की सपोर्ट सर्विसेज (Support Services) से होने वाली आय 24.8% बढ़कर ₹3,664 करोड़ रही, जिसने कुल रेवेन्यू को सहारा दिया।
भारत का राइड-हेलिंग सेक्टर: 'Price War' का मैदान
भारत के राइड-हेलिंग मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा Uber India के बढ़ते घाटे का मुख्य कारण है। Rapido जैसे प्रतिद्वंद्वियों ने मार्केट में अपनी पैठ मजबूत की है, खासकर फोर-व्हीलर सेगमेंट में। Rapido के जीरो-कमीशन और सब्सक्रिप्शन मॉडल की वजह से Uber को भी ड्राइवर्स के लिए अपने इंसेंटिव्स बढ़ाने पड़ रहे हैं। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते Uber का नेट रेवेन्यू गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। हालांकि, Uber की पैरेंट कंपनी Uber Technologies (UBER) ने भारतीय इकाई को मजबूत करने के लिए हाल के महीनों में लगभग ₹3,000 करोड़ का निवेश किया है। भारतीय राइड-हेलिंग मार्केट में अच्छी ग्रोथ दिख रही है, और आने वाले सालों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है।
पैरेंट कंपनी की मजबूती और एनालिस्ट्स का नजरिया
जहां Uber India संघर्ष कर रही है, वहीं उसकी पैरेंट कंपनी Uber Technologies (UBER) वित्तीय रूप से काफी मजबूत स्थिति में है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब $145 बिलियन से $155 बिलियन के बीच है। वॉल स्ट्रीट एनालिस्ट्स (Wall Street Analysts) का कंपनी के शेयर पर ज्यादातर सकारात्मक नजरिया है, और उनका औसत टारगेट प्राइस (Target Price) लगभग $104-$107 है। हालांकि, हाल ही में कुछ एनालिस्ट्स ने Q4 2025 के नतीजों और भविष्य के अनुमानों को देखते हुए टारगेट प्राइस को थोड़ा कम किया है।
अनसस्टेनेबल ग्रोथ का 'बेयर केस'
भारत में Uber की मौजूदा वित्तीय स्थिति कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर सवाल खड़े करती है। जिस तरह से कंपनी इंसेंटिव्स पर भारी खर्च कर रही है, वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं लगता। ड्राइवर्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव्स को सीधे रेवेन्यू से घटाने की Uber की अकाउंटिंग पॉलिसी (Accounting Policy) भारत में उसके मुख्य बिजनेस की असली सेहत को धुंधला कर रही है। सपोर्ट सर्विसेज से होने वाली आय पर निर्भरता यह दर्शाती है कि कोर बिजनेस में चुनौतियां बनी हुई हैं। हालिया एनालिस्ट रिपोर्ट्स में Q1 2026 के लिए मैनेजमेंट के लोअर-देन-एक्सपेक्टेड प्रॉफिट गाइडेंस (Profit Guidance) और पैरेंट कंपनी के मोबिलिटी रेवेन्यू मार्जिन्स में गिरावट की आशंकाएं, यह संकेत दे रही हैं कि चुनौतियां सिर्फ उभरते बाजारों तक सीमित नहीं हैं।