Uber ने भारत में अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब ट्रिप-आधारित कमीशन की जगह ड्राइवर्स के लिए फिक्स्ड सब्सक्रिप्शन फीस लेकर आई है। इसका मकसद **20 लाख** ड्राइवर्स को अपने साथ जोड़े रखना और सप्लाई को मजबूत करना है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Uber Technologies ने भारत में अपने रेवेन्यू सिस्टम को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब तक कंपनी हर ट्रिप पर कमीशन लेती थी, लेकिन अब ड्राइवर्स को फिक्स्ड या टारगेट-आधारित सब्सक्रिप्शन फीस देनी होगी। इससे ड्राइवर्स को अपनी रोजाना की कमाई और खर्चों पर बेहतर कंट्रोल मिलेगा।
ड्राइवर्स को रोकने की कोशिश
गीग इकोनॉमी में ड्राइवर्स का प्लेटफॉर्म छोड़कर जाना एक बड़ी चुनौती है। 20 लाख मंथली एक्टिव ड्राइवर्स के नेटवर्क को बनाए रखने के लिए कंपनी ने 6 घंटे से लेकर 180 दिन तक के अलग-अलग सब्सक्रिप्शन विकल्प पेश किए हैं। इतना ही नहीं, नए ड्राइवर्स के लिए 'पोस्टपेड' सुविधा भी दी गई है ताकि वे काम शुरू करने के बाद फीस भर सकें।
विस्तार और प्रतिस्पर्धा
Uber ने भारत के 125 शहरों से बढ़कर अब 225 शहरों तक अपना विस्तार कर लिया है। Ola जैसे घरेलू प्रतिद्वंद्वियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए यह एक बड़ा दांव है। भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में यह बदलाव कंपनी को सर्विस की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह मॉडल कुछ ड्राइवर्स के लिए कमाई को प्रिडिक्टेबल बनाता है, लेकिन अगर डिमांड कम रही तो फिक्स्ड फीस ड्राइवर्स पर आर्थिक बोझ बन सकती है। इसके अलावा, भारत में गीग वर्कर्स की रेगुलेटरी स्थिति पर भी सरकारी नजर बनी हुई है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह बदलाव कंपनी की रेवेन्यू स्टेबिलिटी और टियर-2, टियर-3 शहरों में सर्विस लेवल को बनाए रखने में कारगर साबित होता है।
