Uber अपनी इंडिया रणनीति में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) के बेड़े को बढ़ाने और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक अपनी पहुंच का विस्तार करने पर ज़ोर दे रहा है। यह कदम सीधे तौर पर भारत सरकार के एनर्जी एफिशिएंसी और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के प्रयासों से जुड़ा है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को देखते हुए। कंपनी के CEO Dara Khosrowshahi ने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और उपभोक्ता मामलों के मंत्री Pralhad Joshi से मुलाकात की, जहां उन्हें EV ट्रांजिशन को तेजी से अपनाने और 'डार्क पैटर्न्स' पर रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बड़े शहरों से बाहर निकलकर छोटे शहरी केंद्रों पर फोकस करना एक बड़ा ग्रोथ अवसर दिखाता है, क्योंकि इन इलाकों में संगठित ऐप-आधारित मोबिलिटी की पैठ कम है। शेयर्ड मोबिलिटी, जैसे कि बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा, पर ध्यान केंद्रित करके Uber सीधे Rapido जैसी कंपनियों को टक्कर दे रहा है, जिसने दोपहिया सेगमेंट में एक बड़ा मार्केट शेयर कब्जाया है। Rapido के पास फिलहाल बाइक टैक्सी में अनुमानित 70-75% मार्केट शेयर है और उसने भारत में कुल राइड्स के मामले में Uber और Ola को पीछे छोड़ दिया है, जिसके पास लगभग 50% शेयर है, जबकि Uber का शेयर लगभग 40% है।
Adani Group के साथ टेक्नोलॉजी हब
अपनी लॉन्ग-टर्म प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, Uber ने Adani Group के साथ साझेदारी में भारत का पहला डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है। यह फैसिलिटी, जो 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है, Uber को बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी टेस्टिंग और डिप्लॉयमेंट में मदद करेगी, जिससे कंपनी 'भारत से, दुनिया के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण' कर सकेगी। यह सहयोग Adani Group के बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाएगा, जिसमें AI-रेडी डेटा सेंटर्स में उनका बड़ा निवेश शामिल है। यह कदम भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग का ग्लोबल हब बनाने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है, और Uber को वैश्विक प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा का उपयोग करने की स्थिति में रखेगा।
बढ़ता कॉम्पिटिशन और बाज़ार की संभावनाएँ
भारतीय राइड-हेलिंग बाज़ार में ज़बरदस्त प्रतिस्पर्धा के बीच Uber अपनी आक्रामक विस्तार योजना पर आगे बढ़ रहा है। जहां Uber और Ola चार-पहिया सेगमेंट में हावी हैं, वहीं Rapido बाइक-टैक्सी और ऑटो-रिक्शा सेगमेंट में एक मजबूत चैलेंजर के तौर पर उभरा है, जिसके 20 लाख से ज़्यादा रजिस्टर्ड पार्टनर हैं। Rapido ने बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा कब्ज़ा लिया है, जिसके पास लगभग 50% बाज़ार हिस्सेदारी है, जबकि Uber की 40% है। हालांकि, Rapido के वॉल्यूम के मुकाबले Uber इंडिया के ऑपरेशंस बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और हायर नेट टेक रेट बनाए हुए हैं। भारतीय राइड-हेलिंग बाज़ार में FY2025 से FY2032 के बीच 18.78% की CAGR से ग्रोथ की उम्मीद है, और यह 2032 तक अनुमानित USD 3,766.79 मिलियन तक पहुंच सकता है। सरकारी नीतियां शहरी भीड़भाड़ को कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए शेयर्ड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर ज़्यादा ज़ोर दे रही हैं।
रेगुलेटरी एजेंडा और चुनौतियाँ
Uber भारतीय रेगुलेटर्स के साथ तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ रहा है। मंत्री Prahlad Joshi ने ड्राइवर्स के लिए EV ट्रांजिशन में मदद करने और 'डार्क पैटर्न्स' का सेल्फ-ऑडिट करने को कहा है, जो सरकार की सस्टेनेबिलिटी और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंडा के साथ अलाइनमेंट की उम्मीद को दर्शाता है। भारत की ओवरऑल EV पॉलिसी (FAME जैसी स्कीम्स के साथ) का लक्ष्य 2030 तक नए वाहन बिक्री में 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का होना है। हालांकि, दोपहिया राइड-हेलिंग बेड़े के लिए छह महीने के भीतर 100% EV ट्रांजिशन का तत्काल फरमान इकोसिस्टम की तैयारी पर चिंताएं पैदा करता है। इन विस्तारों और सरकारी तालमेल के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। Rapido का आक्रामक, कम लागत वाला मॉडल Uber के मार्केट डोमिनेंस को चुनौती दे रहा है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव सेगमेंट में। Uber ने अपने भारतीय ऑपरेशन में ₹3,000 करोड़ का भारी निवेश किया है, लेकिन इसे तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है जिसने ऐतिहासिक रूप से सभी प्लेयर्स के लिए प्रॉफिटेबिलिटी को कठिन बना दिया है। रेगुलेटरी माहौल, जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा दे रहा है, विभिन्न राज्यों की नीतियों का एक जटिल जाल है जो कंप्लायंस में दिक्कतें पैदा कर सकता है। इसके अलावा, गिग इकॉनमी प्लेटफॉर्म्स की तेजी से स्केलिंग ड्राइवर्स की असंतुष्टि और रिटेंशन के जोखिम ला सकती है। Uber के Q1 2026 नतीजों में मजबूत EPS ग्रोथ दिखी, लेकिन रेवेन्यू उम्मीदों से थोड़ा कम रहा। एनालिस्ट्स आम तौर पर सकारात्मक बने हुए हैं, 'Buy' रेटिंग और लगभग $105.01 के एवरेज प्राइस टारगेट के साथ, जो Uber की लॉन्ग-टर्म रणनीति में विश्वास दर्शाता है, लेकिन भारत में प्रतिस्पर्धा की तीव्रता के लिए निरंतर स्ट्रेटेजिक एडैप्टेशन की आवश्यकता है।
