US ने Adani के कार्गो शिफ्टिंग प्लान पर जताई आपत्ति
अमेरिकी परिवहन विभाग ने Adani Airport Holdings Ltd. के उस निर्देश पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कार्गो कंपनियों को नवी मुंबई के नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अपने ऑपरेशन शिफ्ट करने को कहा गया था। मार्च में भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, अमेरिकी DOT ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय एयर ट्रांसपोर्ट एग्रीमेंट के खिलाफ है। अमेरिकी एजेंसी ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी कैरियर्स को इसका पालन करने के लिए मजबूर किया गया, तो समझौते के तहत जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। यह अडानी ग्रुप के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी और भू-राजनीतिक (Geopolitical) चुनौती पेश करता है। यह विवाद अडानी की उस योजना के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसके तहत अगस्त 2026 से मई 2027 के बीच मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नवीनीकरण (Refurbishment) की जरूरतों का हवाला देते हुए, फेडएक्स कॉर्प (FedEx Corp.) जैसी कंपनियों के फ्रेट ऑपरेशन को नए एयरपोर्ट पर ट्रांसफर किया जाना है।
Adani की तेज रफ्तार ग्रोथ पर अंतरराष्ट्रीय नजर
Adani Group, जो भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर है और जिसके पास आठ एयरपोर्ट हैं, 2030 तक और एयरपोर्ट हासिल करने के लिए $11 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रहा है। कंपनी तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में अपनी पैठ मजबूत कर रही है। भारतीय विमानन इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट के 2025 में $103.41 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $125.81 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण हवाई यातायात में बढ़ोतरी और सरकारी निवेश है। ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises का मार्केट कैप लगभग ₹2.7 ट्रिलियन है। इसकी तुलना में, प्रतिद्वंद्वी GMR Airports का मार्केट कैप करीब ₹1 लाख करोड़ है और उसका P/E रेश्यो निगेटिव है, जो मौजूदा वित्तीय घाटे को दर्शाता है।
हालांकि, Adani की तेज ग्रोथ और मुंबई के मौजूदा व नए एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर उसका कंट्रोल अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में आ गया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कार्गो कंपनियों को शिफ्ट करने का यह दबाव सिर्फ एक ऑपरेशनल फैसला नहीं, बल्कि नए एयरपोर्ट को भरने की एक सोची-समझी रणनीति है। इससे भारत की वित्तीय राजधानी में ट्रैफिक आवंटन पर Adani के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट से ऑपरेट करने वाली एकमात्र अमेरिकी कार्गो एयरलाइन FedEx ने इस मुद्दे को सीधे अमेरिकी DOT के सामने उठाया है, क्योंकि उसे अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में व्यवधान और ट्रीटी-प्रोटेक्टेड ऑपरेटिंग स्लॉट्स खोने का डर है।
भू-राजनीतिक जोखिम और Adani के वैल्यूएशन पर असर
यह एविएशन विवाद Adani के लिए एक संवेदनशील समय पर आया है, क्योंकि ग्रुप पहले भी अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की जांच और अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की जांच का सामना कर चुका है। हालांकि, अप्रैल 2026 की शुरुआत में एक अमेरिकी अदालत द्वारा SEC सिक्योरिटीज फ्रॉड मुकदमे को खारिज करने की अर्जी स्वीकार किए जाने के बाद Adani Group के शेयरों में तेजी आई थी, लेकिन अंदरूनी गवर्नेंस और रेगुलेटरी मुद्दे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। अमेरिकी DOT के साथ यह मौजूदा टकराव, भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है, जिससे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में विदेशी निवेश की भावना पर असर पड़ सकता है।
वैल्यूएशन के नजरिए से देखें तो, Adani Enterprises का पॉजिटिव P/E रेश्यो लाभप्रदता (Profitability) को दर्शाता है, लेकिन ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों में लगभग 2.5x का कर्ज-से-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो, कम कर्ज वाले प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में एक चिंता का विषय बना हुआ है। इसके अलावा, विश्लेषकों की राय बंटी हुई है; जहां कुछ 'BUY' रेटिंग और ऊंचे प्राइस टारगेट बनाए हुए हैं, वहीं कुछ मार्च 2026 के अंत में देखे गए स्टॉक ट्रेंड में गिरावट के कारण Adani Enterprises को 'Strong Sell' कैंडिडेट बता रहे हैं। अमेरिकी जवाबी कार्रवाई की संभावना, हालांकि अभी स्पष्ट नहीं है, भू-राजनीतिक और रेगुलेटरी अनिश्चितता का एक तत्व जोड़ती है, जो भारत के एविएशन सेक्टर की मजबूत घरेलू विकास कहानी को धूमिल कर सकती है।
भारत के एविएशन सेक्टर पर असर
भारतीय एविएशन मार्केट में विकास की अपार संभावनाएं बनी हुई हैं, और अनुमान है कि 2030 तक यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एयर पैसेंजर मार्केट बन जाएगा। हालांकि, अमेरिकी DOT और Adani Airport Holdings के बीच वर्तमान विवाद जटिलताएं पैदा करता है। इस ट्रेड एग्रीमेंट चुनौती का नतीजा, भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, अंतरराष्ट्रीय कैरियर की पहुंच और भारत की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों में विदेशी निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकता है। भारतीय सरकार ने कथित तौर पर इस मामले को सुलझाने के लिए Adani के साथ बातचीत की है, लेकिन अमेरिका का रुख ट्रीटी की बाध्यताओं को बनाए रखने पर जोर देता है। इससे यह स्पष्ट है कि Adani के लगातार विस्तार के लिए इस राजनयिक और रेगुलेटरी चुनौती से निपटना महत्वपूर्ण होगा।