सरकार ने UDAN स्कीम को अगले 10 साल के लिए बढ़ा दिया है और इसमें **₹30,000 करोड़** का फंड आवंटित किया गया है। नए नियमों के तहत अब एयरपोर्ट बनाने का समय घटाकर 18 महीने करने का लक्ष्य है, जबकि DGCA प्राइवेट एयरलाइंस जैसे SpiceJet पर अपनी कड़ी नजर बनाए हुए है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा कदम
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने UDAN रीजनल कनेक्टिविटी पहल को अगले एक दशक के लिए हरी झंडी दे दी है। इस योजना का मकसद देश के छोटे और दूर-दराज के इलाकों को मुख्य एयर नेटवर्क से जोड़ना है। इस प्रोग्राम से अर्थव्यवस्था में ₹60,000 करोड़ तक का आर्थिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए ₹30,000 करोड़ की राशि तय की है और इसमें 21 राज्य पहले ही नए फ्रेमवर्क के साथ जुड़ने के लिए सहमत हो गए हैं।
तेजी से काम करने का लक्ष्य
सरकार इस बार प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए 'चैलेंज-बेस्ड मॉडल' अपना रही है। पहले जहां एयरपोर्ट बनाने में औसतन तीन साल लग जाते थे, अब उसे घटाकर सिर्फ 18 महीने करने का लक्ष्य है। सरकार का टारगेट साल 2047 तक कुल ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स की संख्या 350 के पार ले जाना है। निवेशकों के लिए यह खबर अच्छी है क्योंकि इससे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ेगी, हालांकि EPC कंपनियों और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स की क्षमता पर नजर रखना जरूरी होगा।
रेगुलेटरी निगरानी जारी
इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ सरकार सुरक्षा मानकों को लेकर भी सख्त है। Directorate General of Civil Aviation (DGCA) लगातार SpiceJet जैसी निजी एयरलाइंस की फाइनेंशियल सेहत और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स की मॉनिटरिंग कर रही है। उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ किया है कि एयरलाइंस का फाइनेंशियल स्टेबलाइजेशन लेंडर्स और कंपनी के बीच का मामला है, लेकिन सेफ्टी में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले समय में निवेशकों के लिए प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की रफ्तार सबसे अहम होगी। जमीन अधिग्रहण, स्थानीय मंजूरी और कंस्ट्रक्शन पार्टनर्स की फाइनेंशियल स्थिरता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। एयरपोर्ट निर्माण से जुड़ी कंपनियों और एयरलाइन सेक्टर की ऑपरेशनल अपडेट्स पर बारीक नजर रखना ही इस सेक्टर में मुनाफे की चाबी होगी।
