UDAN 2.0 का नया अवतार: एयरपॉ्ट्स और एयरलाइंस के लिए कड़े नियम लागू!

TRANSPORTATION
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AuthorMehul Desai|Published at:
UDAN 2.0 का नया अवतार: एयरपॉ्ट्स और एयरलाइंस के लिए कड़े नियम लागू!

भारत की क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना, UDAN 2.0, अब नए और कड़े नियमों के साथ आ गई है। इस बार, एयरपोर्ट्स के लिए चयन प्रक्रिया को और सख्त बना दिया गया है, और एयरलाइंस को बोली लगाने से पहले अपने बेड़े (fleet) की उपलब्धता का प्रमाण देना होगा।

UDAN 2.0: क्यों बदले नियम?

क्षेत्रीय संपर्क योजना (Regional Connectivity Scheme) के दूसरे चरण, यानी UDAN 2.0, का फोकस परिचालन की व्यवहार्यता (operational viability) पर है। सरकार पहले चरण की ढीली-ढाली बोली प्रक्रिया से हटकर अब 'चैलेंज मोड' पर ज़ोर दे रही है। इसमें बेहतर मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्य सरकारों की मज़बूत प्रतिबद्धता वाले एयरपोर्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी। अब एयरपोर्ट्स को उनकी औद्योगिक या पर्यटन हब से निकटता, और रनवे व पैसेंजर टर्मिनल जैसी सुविधाओं की तैयारी के आधार पर स्कोर दिया जाएगा।

राज्य सरकारों की भूमिका और ATF पर छूट

इस चरण में एक अहम बदलाव यह है कि राज्य सरकारों का सक्रिय समर्थन ज़रूरी होगा। एयरपोर्ट्स पर तभी विचार किया जाएगा जब राज्य सरकारें स्पष्ट वित्तीय सहायता और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स छूट की पेशकश करें। इसका मकसद उन ऊंचे परिचालन लागतों को कम करना है, जिनके कारण पहले कई क्षेत्रीय मार्ग टिकाऊ नहीं रह पाते थे। सरकार ऐसे 50 एयरपोर्ट्स को शॉर्टलिस्ट करने की योजना बना रही है जो इन सख्त इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय मानदंडों को पूरा करते हों, इससे पहले कि बोली प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

पिछली योजना की चुनौतियां

पहले चरण में लगभग आधी रूट बिड जीतने के बावजूद नियमित वाणिज्यिक उड़ानें शुरू नहीं हो पाई थीं। कुछ एयरपोर्ट्स, जिन पर भारी निवेश हुआ था, वे भी लगातार एयरलाइन ट्रैफिक को आकर्षित करने में विफल रहे, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर का कम इस्तेमाल हुआ। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश का कुशीनगर एयरपोर्ट, जिस पर ₹448 करोड़ का निवेश हुआ था, 2023 से व्यावसायिक रूप से गैर-संचालित (non-operational) है। यह दर्शाता है कि जब हवाई कनेक्टिविटी योजनाएं बाज़ार की मांग के अनुरूप नहीं होतीं तो कितना बड़ा वित्तीय जोखिम होता है।

गंभीर ऑपरेटरों पर लगाम

गैर-गंभीर ऑपरेटरों (non-serious operators) की समस्या से निपटने के लिए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने अनिवार्य फ्लीट वेरिफिकेशन (fleet verification) नियम लागू किया है। अब एयरलाइंस को नए रूट के लिए बोली लगाने से पहले यह साबित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त विमान क्षमता है। यह उन पिछली घटनाओं को लक्षित करता है जहां सीमित या बिना किसी बेड़े वाली कंपनियों ने रूट जीते लेकिन संचालन शुरू करने में विफल रहीं, जिससे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय लिंक खाली रह गए। सरकार दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख महानगरों के एयरपोर्ट्स को भी छोटे क्षेत्रीय वाहकों (regional carriers) के लिए विशिष्ट लैंडिंग और टेक-ऑफ स्लॉट आरक्षित करने के लिए बाध्य कर रही है। इन प्रमुख हब तक पहुंच क्षेत्रीय एयरलाइनों के लिए यात्रियों के लिए टिकाऊ, जुड़े हुए नेटवर्क बनाने हेतु महत्वपूर्ण है। निवेशकों के लिए, UDAN 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह सख्त निगरानी पहले चरण की तुलना में अधिक रूट स्थिरता और कम बर्बाद पूंजी में तब्दील होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.