सरकार ने तमिलनाडु के V.O. Chidambaranar Port के विस्तार के लिए **₹17,167 करोड़** के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट के जरिए नए आउटर हार्बर और कंटेनर टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा, जो इंफ्रा कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।
प्रोजेक्ट की बारीकियां और निवेश
कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित V.O. Chidambaranar पोर्ट को अपग्रेड करने की हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी तट पर बढ़ते समुद्री व्यापार को संभालने के लिए क्षमता विस्तार करना है।
प्रोजेक्ट को दो मुख्य वित्तीय मॉडलों में बांटा गया है:
- हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM): इसके तहत लगभग ₹11,733 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस मॉडल में सरकार प्रोजेक्ट की लागत का एक हिस्सा खुद वहन करती है, जिससे प्राइवेट डेवलपर्स पर आर्थिक दबाव कम होता है और रेवेन्यू का प्रवाह अधिक स्थिर रहता है।
- DBFOT मॉडल: कंटेनर टर्मिनल के निर्माण के लिए ₹5,434 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसे 'डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर' मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। इसमें निर्माण और संचालन की पूरी जिम्मेदारी प्राइवेट ऑपरेटर्स की होगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह कदम भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार लाने की सरकारी कोशिशों का हिस्सा है। बड़े पोर्ट ऑपरेटरों, EPC कंपनियों और मैरीटाइम कंस्ट्रक्शन फर्मों के लिए यहां टेंडर के बड़े मौके बन रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को सावधान भी रहने की जरूरत है। मेगा प्रोजेक्ट्स में अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और निर्माण में देरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा, प्रोजेक्ट की सफलता पूरी तरह से ट्रेड वॉल्यूम में बढ़ोतरी और प्रतिस्पर्धी पोर्ट्स के मुकाबले अपनी जगह बनाने पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार अब टेंडर डॉक्यूमेंट्स और बिडिंग की समय-सीमा पर नजर टिकाए बैठा है।
