रिपोर्ट में क्या खुलासे?
इस नई रिपोर्ट ने बिज़नेस ट्रैवल की दुनिया से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। जहां एक तरफ कंपनियां टेक्नोलॉजी को अपनाकर अपनी यात्राओं को आसान और ज्यादा असरदार बना रही हैं, वहीं हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़ी मुश्किलें कॉर्पोरेट बजट पर भारी पड़ रही हैं। पिछले साल के मुकाबले 80% कंपनियों ने टिकट के औसत दाम में बढ़ोतरी दर्ज की है।
टेक्नोलॉजी और 'ब्लेज़र' का बढ़ता चलन
रिपोर्ट बताती है कि 70% से ज्यादा कॉर्पोरेट्स बुकिंग, अप्रूवल और खर्चों के मैनेजमेंट के लिए टेक्नोलॉजी-बेस्ड सॉल्यूशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, 68% कंपनियां 'ब्लेज़र' (बिज़नेस और लेज़र का मेल) ट्रैवल में भी ग्रोथ देख रही हैं। 62% कंपनियां अब वैल्यू-फॉर-मनी फैसलों को प्राथमिकता दे रही हैं, और 56% लोग ट्रैवलर के अनुभव और उनकी सुरक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। लगभग 60% कंपनियां अपनी ट्रैवल पॉलिसी में बदलाव भी कर रही हैं।
कंपनी की बैकग्राउंड
Thomas Cook (India) Limited, जिसकी जड़ें 1881 तक जाती हैं, और इसकी सहायक कंपनी SOTC Travel, जो 1949 में स्थापित हुई थी, भारतीय ट्रैवल इंडस्ट्री के बड़े नाम हैं। Fairfax Financial Holdings की सब्सिडियरी TCIL का भारत में 200 से ज्यादा जगहों पर फैला नेटवर्क है। 2015 में SOTC का अधिग्रहण करने के बाद, इस ग्रुप ने खुद को एक इंटीग्रेटेड ट्रैवल सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर मजबूत किया है।
क्या बदलाव की उम्मीद है?
कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे:
- बुकिंग, अप्रूवल और खर्चों के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित करने के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म में निवेश बढ़ाएंगी, ताकि बेहतर विजिबिलिटी मिल सके।
- कॉस्ट कंट्रोल, ट्रैवलर की भलाई और नियमों के पालन के बीच संतुलन बनाने के लिए अपनी ट्रैवल पॉलिसी का फिर से मूल्यांकन करेंगी।
- बढ़ते हवाई किराए के असर को कम करने के लिए सप्लायर कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से बातचीत करेंगी।
- कर्मचारियों की बदलती उम्मीदों को पूरा करने के लिए 'ब्लेज़र' घटकों को ट्रैवल प्लानिंग में शामिल करेंगी।
- ट्रैवल बजट को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए GST और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की प्रक्रियाओं को ऑप्टिमाइज़ करेंगी।
इन जोखिमों पर रखें नज़र
- बढ़ते एयरफेयर: 80% कॉर्पोरेट्स ने पिछले साल औसत टिकट कीमतों (ATP) में वृद्धि की सूचना दी है, जिनमें से 36% से अधिक ने 15% से अधिक की बड़ी वृद्धि देखी है, जो बजट के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- GST और ITC की दिक्कतें: 55% से अधिक कॉर्पोरेट्स GST और ITC की एप्लीकेबिलिटी, अनुपालन और ऑप्टिमाइज़ेशन से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
- पॉलिसी में सख्ती का असर: लागत का दबाव बढ़ने से कॉर्पोरेट्स सख्त ट्रैवल नीतियां लागू कर सकते हैं और सप्लायर कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से बातचीत कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों के लिए ट्रैवल की फ्लेक्सिबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
बाज़ार में कौन हैं प्रतिद्वंद्वी?
भारतीय कॉर्पोरेट ट्रैवल मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। प्रमुख खिलाड़ियों में MakeMyTrip और Yatra Online जैसे ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट्स के साथ-साथ FCM Travel Solutions और All 4 Season जैसी कॉर्पोरेट ट्रैवल मैनेजमेंट कंपनियां शामिल हैं। यह बाजार 2023 में लगभग USD 10.6 बिलियन का था, और ये कंपनियां भी टेक्नोलॉजी, लागत दक्षता और बेहतर ट्रैवलर अनुभव जैसी ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठा रही हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब इन बातों पर नज़र रखनी चाहिए:
- कॉर्पोरेशन्स द्वारा नई ट्रैवल नीतियों का वास्तविक कार्यान्वयन और प्रभावशीलता।
- कॉर्पोरेट्स और ट्रैवल सप्लायर्स (एयरलाइंस, होटल) के बीच मूल्य निर्धारण और अनुबंधों को लेकर बातचीत के नतीजे।
- टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन की गति और दक्षता और अनुपालन बढ़ाने में इसकी सफलता।
- हवाई किराए और अन्य यात्रा लागतों में लगातार वृद्धि पर कॉर्पोरेट्स की प्रतिक्रिया।
- 'ब्लेज़र' ट्रैवल में आगे के रुझान और कॉर्पोरेट रणनीतियों में उनका एकीकरण।
- अनुमानित 65% वृद्धि के मुकाबले बिज़नेस ट्रैवल वॉल्यूम की समग्र रिकवरी दर।