भारत में Tesla का बड़ा चार्जिंग नेटवर्क प्लान
Tesla अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत के बड़े शहरों में तेजी से फैला रही है। कंपनी दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में सुपरचार्जर्स और चार्जिंग हब लगा रही है। इसका मकसद नई गाड़ियों, जैसे कि छह-सीटर Model YL (कीमत ₹61.99 लाख) के लिए ग्राहकों की 'रेंज एंजाइटी' को दूर करना है। Tesla अभी भारत में पांच सुपरचार्जिंग स्टेशन चला रही है और अपने ग्लोबल अनुभव (8,100 से ज्यादा स्टेशन और 80,000 सुपरचार्जर्स) का इस्तेमाल करके इसे और बढ़ाना चाहती है। Tesla India के जनरल मैनेजर शरद अग्रवाल ने बताया कि कंपनी पूरे देश में होम चार्जिंग सिस्टम लगाने की क्षमता भी विकसित कर रही है।
टैरिफ, कॉम्पिटिशन और लागत की तिकड़म
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान के बावजूद, Tesla की भारत में मौजूदगी इंपोर्ट पर लगने वाले 100% तक के भारी टैरिफ से रुकी हुई है। इन ड्यूटीज के कारण Tesla की गाड़ियों की बिक्री बहुत कम रही है; रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉन्च के बाद से करीब 350 Model Y यूनिट्स की ही बिक्री हुई है। भारतीय सरकार लंबे समय से लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है, जिसे Tesla ने फिलहाल नहीं माना है। इस स्थिति में, Tesla चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही है, वहीं इंपोर्ट ड्यूटी के कारण उसके व्हीकल सेल्स पर प्राइसिंग का दबाव बना हुआ है।
इसके मुकाबले, Tata Motors जैसी कंपनियाँ तेजी से अपना चार्जिंग नेटवर्क बढ़ा रही हैं। Tata इस दशक के अंत तक 1 लाख से ज्यादा पब्लिक चार्जिंग पॉइंट लगाने का लक्ष्य रखा है, जो कि मौजूदा 22,000 से काफी ज्यादा है। Mahindra भी अपने Charge_IN नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और 2027 तक 1,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने और HPCL के साथ मिलकर फ्यूल स्टेशनों पर चार्जर लगाने की योजना बना रहा है। ये डोमेस्टिक प्लेयर्स, जिन्हें लोकल मैन्युफैक्चरिंग का फायदा है, Tesla के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।
निवेश की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल
एनालिस्ट्स Tesla के बड़े निवेशों पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर भारत जैसे महंगे ओवरसीज एक्सपेंशन पर। BNP Paribas के एनालिस्ट्स का कहना है कि Tesla का इंडिया एक्सपेंशन महंगा साबित हो रहा है। कंपनी का हाई वैल्यूएशन (P/E रेश्यो लगभग 365) बताता है कि निवेशक ऑटो सेल्स से परे भविष्य की ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से होने वाला प्रॉफिट एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर मार्केट की नजर
Tesla के स्टॉक (TSLA) पर नजर डालें तो 24 अप्रैल 2026 को यह लगभग $375-380 पर ट्रेड कर रहा था, जिसका मार्केट कैप करीब $1.4 ट्रिलियन और ट्रेडिंग वॉल्यूम 90-94 मिलियन शेयर्स के आसपास था। कंपनी की Q1 2026 की अर्निंग्स रिपोर्ट में 16% साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ दिखी थी। हालांकि, बढ़ते कैपिटल स्पेंडिंग और EV डिमांड में नरमी को लेकर चिंताओं के कारण मार्केट की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। Tesla की भारत की महत्वाकांक्षी योजना इंपोर्ट ड्यूटी और कड़े कॉम्पिटिशन के चलते निवेश पर रिटर्न को एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना देती है।
