तेलंगाना सरकार राज्य के विकास को हैदराबाद से आगे ले जाने के लिए वारंगल, भद्राद्री कोठागुडेम और अदिलाबाद में रीजनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रही है। वारंगल में जमीन अधिग्रहण के लिए **₹205 करोड़** का आवंटन कर दिया गया है।
तेलंगाना सरकार राज्य के आर्थिक ढांचे को विकेंद्रीकृत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने वारंगल, भद्राद्री कोठागुडेम और अदिलाबाद में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का खाका तैयार किया है। इससे न केवल इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को मजबूती मिलेगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी।
वारंगल और कोठागुडेम का हाल
वारंगल का मामनूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसके लिए ₹205 करोड़ का फंड रिलीज किया जा चुका है, जिसका उद्देश्य जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना है। सरकार का लक्ष्य अगले 2.5 साल में इसे चालू करने का है। यह एयरपोर्ट काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क और काजीपेट कोच फैक्ट्री जैसे औद्योगिक केंद्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
वहीं, भद्राद्री कोठागुडेम में साइट के चयन पर अभी तकनीकी मूल्यांकन चल रहा है। 7 सितंबर, 2026 को एक केंद्रीय तकनीकी टीम यहां संभावित जमीनों का निरीक्षण करेगी। पहले के प्रयास तकनीकी बाधाओं के कारण विफल रहे थे, इसलिए यह सर्वे बेहद अहम है।
अदिलाबाद में जॉइंट-यूज मॉडल
अदिलाबाद एयरपोर्ट को भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है। इसे 'जॉइंट-यूज' एयरपोर्ट के रूप में तैयार किया जाएगा, जिससे यह डिफेंस और सिविल एविएशन दोनों की जरूरतों को पूरा करेगा।
आर्थिक असर और चुनौतियां
हालांकि यह प्रोजेक्ट्स निवेश के लिहाज से अच्छे संकेत हैं, लेकिन निवेशकों को एग्जीक्यूशन रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। कोठागुडेम में साइट की व्यवहार्यता एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण और केंद्र-राज्य समन्वय में आने वाली जटिलताएं प्रोजेक्ट्स की समयसीमा को प्रभावित कर सकती हैं। इन प्रोजेक्ट्स की सफलता बजट के सही प्रवाह और समय पर रेगुलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगी।
