टाटा स्टील (Tata Steel) ने ओडिशा में स्थित नीलांचल इस्पात निगम (Neelachal Ispat Nigam) प्लांट की क्षमता को **4.8 मिलियन टन** तक बढ़ाने के लिए **₹33,873 करोड़** के बड़े निवेश का ऐलान किया है। साथ ही, कंपनी अपनी शिपिंग ज्वाइंट वेंचर में Martrade की **23%** हिस्सेदारी **₹335 करोड़** में खरीद रही है। यह कदम कंपनी के मजबूत पहली तिमाही के नतीजों के बाद आया है, जिसमें नेट प्रॉफिट **19%** बढ़ा था।
नीलांचल इस्पात में लगेगा ₹33,873 करोड़ का बूस्टर
टाटा स्टील (Tata Steel) ने अपने परिचालन को मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना का खुलासा किया है। कंपनी के बोर्ड ने ओडिशा में स्थित नीलांचल इस्पात निगम (Neelachal Ispat Nigam) की क्षमता को 48 लाख टन (4.8 मिलियन टन) तक बढ़ाने के लिए ₹33,873 करोड़ के भारी-भरकम निवेश को मंजूरी दी है। यह प्लांट टाटा स्टील ने हाल ही में विनिवेश प्रक्रिया के दौरान अधिग्रहित किया था और अब इसे कंपनी के लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए एकीकृत किया जा रहा है।
इस बड़े निवेश का मुख्य उद्देश्य कंपनी के ब्रांडेड स्टील प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को पूरा करना है। ओडिशा प्लांट में उत्पादन क्षमता बढ़ने से कंपनी कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेगमेंट्स में अपनी बाजार हिस्सेदारी को और मजबूत करना चाहती है। हालांकि, निवेशकों को इस प्रोजेक्ट की समय-सीमा पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इस तरह की बड़ी क्षमता वृद्धि में काफी समय और पूंजी लगती है, जो नई क्षमता के चालू होने तक कैश फ्लो पर असर डाल सकती है।
लॉजिस्टिक्स में भी बड़ा कदम: Martrade की हिस्सेदारी खरीदी
इसके साथ ही, टाटा स्टील अपने लॉजिस्टिक्स बिजनेस को भी पुनर्गठित कर रही है। कंपनी ने अपनी शिपिंग ज्वाइंट वेंचर, TM International Logistics में जर्मनी की Martrade की 23% हिस्सेदारी ₹335 करोड़ में खरीदने पर सहमति जताई है। इस सौदे के पूरा होने के बाद, टाटा स्टील की इस वेंचर में हिस्सेदारी 51% से बढ़कर 74% हो जाएगी। वहीं, जापानी कंपनी NYK के पास 26% शेयर बने रहेंगे। यह कदम जुलाई 2001 से चले आ रहे एक पार्टनरशिप को खत्म करेगा और टाटा स्टील को अपने इंटरनल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर अधिक नियंत्रण देगा।
पहली तिमाही के नतीजे थे दमदार
इन बड़े फैसलों के पीछे कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे भी अहम हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, टाटा स्टील ने ₹2,385 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 19% अधिक है। बेहतर प्राइस रियलाइजेशन के कारण कंपनी के रेवेन्यू में 15% का इजाफा हुआ और यह ₹60,412 करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में, कंपनी ने ₹3,579 करोड़ का कैपिटल स्पेंड भी किया था। नई विस्तार योजना को देखते हुए, निवेशकों को कंपनी के भविष्य के डेट लेवल्स और कैपिटल एलोकेशन को मैनेज करने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। इन निवेशों का असली असर मार्केट की स्थिति, स्टील की कीमतों में स्थिरता और प्रोजेक्ट के सफल निष्पादन पर निर्भर करेगा।
