Tata Sons ने Air India की डगमगाती आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए **₹10,000 करोड़** से ज्यादा के फ्रेश कैपिटल इन्फ्यूजन को मंजूरी दी है। कंपनी ने FY26 में **₹22,238 करोड़** का बड़ा नेट लॉस दर्ज किया है और सिर पर **₹40,000 करोड़** का कर्ज है।
भारी नुकसान और कर्ज का बोझ
इस पूंजी की सख्त जरूरत इसलिए है क्योंकि मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में एयरलाइन को ₹22,238 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान हुआ है। एयरलाइन पर 11 लेंडर्स का कुल कर्ज लगभग ₹40,000 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। पैरेंट कंपनी Tata Sons ने स्पष्ट किया है कि यह पैसा केवल ग्रोथ के लिए नहीं, बल्कि कामकाज को जारी रखने के लिए एक जरूरी लाइफलाइन है। अब एयरलाइन को यह बताना होगा कि वे इस फंड का इस्तेमाल कैसे करेंगे।
सिंगापुर एयरलाइंस पर सबकी नजर
Air India में 24.7% हिस्सेदारी रखने वाली Singapore Airlines के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है। अगर वे अपनी हिस्सेदारी को डाइल्यूट (Dilute) होने से बचाना चाहते हैं, तो उन्हें इस दौर में लगभग ₹3,350 करोड़ का निवेश करना होगा। हालांकि, सिंगापुर सरकार ने कहा है कि यह फैसला पूरी तरह से कंपनी का कमर्शियल निर्णय होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स इस पर नजर बनाए हुए हैं कि माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स एयरलाइन के टर्नअराउंड प्लान पर कितना भरोसा जताते हैं।
चुनौतियों के बीच नया नेतृत्व
यह फंडिंग एक ऐसे वक्त में आई है जब कंपनी का नेतृत्व बदल चुका है। 5 अगस्त, 2026 को Tewolde Gebremariam ने CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते फ्यूल कॉस्ट और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) हैं, जिसने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के रूट और खर्च को प्रभावित किया है। अब देखना यह होगा कि क्या नई लीडरशिप फ्लीट विस्तार और बढ़ती लागत को मैनेज करते हुए एयरलाइन को मुनाफे की राह पर ला पाती है या नहीं।
