नुकसान का बढ़ता बोझ
एयर इंडिया का घाटा, जो ₹21,000 करोड़ के पार जाने का अनुमान है, Tata Sons पर भारी वित्तीय दबाव डाल रहा है। यह घाटा कंपनी के शुरुआती ₹2,000 करोड़ के बजट से दस गुना ज़्यादा है। यह स्थिति ग्रुप की एविएशन और डिजिटल जैसी कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर्स में आक्रामक विस्तार की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि ये नुकसान उम्मीद से कहीं ज़्यादा हैं।
ग्रुप की अन्य कंपनियों की हालत और कर्ज का पहाड़
सिर्फ एयर इंडिया ही नहीं, Tata Digital (FY26 में ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा का अनुमानित घाटा), Tata Electronics (लगभग ₹3,000 करोड़ का अनुमानित घाटा) और Tejas Networks (₹1,000 करोड़ का अनुमानित घाटा) जैसे अहम प्रोजेक्ट्स भी भारी नुकसान में चल रहे हैं। नतीजतन, Tata Sons का कुल कर्ज FY25 तक बढ़कर ₹3.46 लाख करोड़ हो गया है, और 31 सब्सिडियरी कंपनियां घाटे में हैं। पिछले एक साल में ग्रुप की 24 लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप में ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा की गिरावट आई है। RBI के नए नियमों के चलते Tata Sons, जो अब 'अपर-लेयर' नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है, ज़्यादा आसानी से कर्ज नहीं उठा सकती, जिससे उसे इंटरनल कैश फ्लो पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
लीडरशिप पर उठे सवाल और इस्तीफे
इन वित्तीय दबावों का असर लीडरशिप पर भी दिख रहा है। Tata Sons बोर्ड ने चेयरमैन N. Chandrasekaran की री-अपॉइंटमेंट को टाल दिया है। ऐसी खबरें हैं कि Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने कैपिटल एलोकेशन और ग्रुप के फाइनेंशियल परफॉरमेंस को लेकर चिंता जताई है। इसी बीच, एयर इंडिया के CEO Campbell Wilson ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके कार्यकाल में एयरलाइन के वित्तीय नुकसान को रोकने के प्रयास सफल नहीं हुए। विल्सन का जाना ऐसे समय में हुआ है जब एयरलाइन को मर्जर को इंटीग्रेट करने और 570 नए विमानों को शामिल करने की बड़ी चुनौती का सामना करना है। यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब Shapoorji Pallonji Group अपनी 18.4% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर सकता है, जिसके लिए Tata Sons को बड़ी रकम का इंतज़ाम करना पड़ सकता है।
एविएशन सेक्टर की चुनौतियाँ और एयर इंडिया की स्थिति
भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए FY26 मुश्किल रहने वाला है, जहां इंडस्ट्री को कुल ₹17,000–18,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। बढ़ती ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें, कमजोर पड़ता रुपया और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता इस पर असर डाल रहे हैं। जहां IndiGo जैसी कंपनियाँ Q3 FY26 में प्रॉफिट (हालांकि साल-दर-साल गिरावट के साथ) में हैं, वहीं Air India की स्थिति ज़्यादा गंभीर दिख रही है। एयर इंडिया के $400 मिलियन के फ्लीट मॉडर्नाइजेशन और बेड़े की विश्वसनीयता में सुधार के बावजूद, ये ऑपरेशनल कदम भारी वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
Tata Sons के सामने वित्तीय जोखिम और रणनीतिक मोड़
Tata Sons के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि वर्तमान वित्तीय दबाव पूरे ग्रुप में फैल सकता है, जिससे लंबी अवधि के रणनीतिक लक्ष्य खतरे में पड़ सकते हैं। एयर इंडिया और Tata Digital में भारी निवेश, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए है, फिलहाल संसाधनों पर एक बड़ा बोझ बन गया है, खासकर RBI के नए नियमों से कर्ज उठाने की सीमाएं कसी हुई हैं। यह स्थिति ग्रुप की वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती है। वहीं, Campbell Wilson जैसे प्रमुख लीडर्स का जाना और ग्रुप लेवल पर लीडरशिप में अनिश्चितता, एग्जीक्यूशन क्षमता पर सवाल खड़े करती है। एयर इंडिया के अरबों डॉलर के फ्लीट विस्तार की योजना को उसकी वर्तमान वित्तीय हालत और सेक्टर के नेगेटिव आउटलुक को देखते हुए सावधानी से देखने की जरूरत है। Tata Sons अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ उसे अपनी आक्रामक विविधीकरण रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। फोकस अब कैपिटल एलोकेशन पर कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय करने पर है।