भारत के डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (Dedicated Freight Corridors) अब लंबी दूरी का माल सड़कों से रेल की ओर ले जा रहे हैं, जिससे ट्रकों की मांग के पैटर्न में बदलाव आ रहा है। Tata Motors को उम्मीद है कि लंबी दूरी के ट्रैक्टर-ट्रेलर की बिक्री घटेगी, वहीं लास्ट-माइल डिलीवरी और इंटरमीडिएट कमर्शियल वाहनों (Intermediate Commercial Vehicles) में ग्रोथ देखने को मिलेगी।
Detailed Coverage
माल ढुलाई का बदलता परिदृश्य
भारत में बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर (Dedicated Freight Corridors) माल की आवाजाही का तरीका बदल रहे हैं। जैसे-जैसे ईस्टर्न और वेस्टर्न कोरिडोर पूरी तरह चालू हो रहे हैं, भारी सामान और कंटेनर वाली चीज़ें रेल से तेज़ी से पहुंचाई जा रही हैं। इसका असर ऑटो इंडस्ट्री पर भी दिख रहा है। अब कंपनियां लंबी दूरी के लिए रेल का इस्तेमाल ज़्यादा कर रही हैं, जो 2014 में सिर्फ 1% था, वहीं अब यह 20% तक पहुंच गया है।
Tata Motors पर क्या होगा असर?
कमर्शियल वाहनों (Commercial Vehicles) के बड़े खिलाड़ी Tata Motors का मानना है कि इन रेल कोरिडोर से ट्रकों का कुल बाज़ार सिकुड़ेगा नहीं, बल्कि बदलेगा। कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि खासकर वेस्टर्न कोरिडोर लंबी दूरी के ट्रैफिक को सड़कों से हटाकर रेल की ओर ले जाएगा। इसका सबसे ज़्यादा असर ट्रैक्टर-ट्रेलर (Tractor-Trailer) सेगमेंट पर पड़ेगा, जिसका इस्तेमाल ज़्यादातर एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट ट्रेड के लिए होता है।
लास्ट-माइल डिलीवरी और माइनिंग टिपर में बूम
हालांकि, इस बदलाव की भरपाई दूसरी कैटेगरी में होने वाली ग्रोथ से हो जाएगी। जैसे-जैसे ट्रेनें लंबी दूरी का सामान ढोएंगी, हब-एंड-स्पोक लॉजिस्टिक्स मॉडल (hub-and-spoke logistics model) का चलन बढ़ेगा। इसके लिए रेल हब से फाइनल डेस्टिनेशन तक माल पहुंचाने के लिए छोटे ट्रकों की ज़रूरत होगी। ऐसे में, इंटरमीडिएट लाइट कमर्शियल व्हीकल (Intermediate Light Commercial Vehicles) और स्मॉल कमर्शियल व्हीकल (Small Commercial Vehicles) की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा, ईस्टर्न कोरिडोर से उस इलाके में माइनिंग एक्टिविटी बढ़ने का अनुमान है, जिससे कोयला और अन्य खनिजों को ढोने वाले हैवी-ड्यूटी टिपर (Heavy-duty Tippers) की मांग बनी रह सकती है। हालांकि, रेल लॉजिस्टिक्स तेज़ और ज़्यादा क्षमता वाली है, लेकिन लचीलेपन और डोर-टू-डोर कनेक्टिविटी के लिए सड़क परिवहन ही सबसे आगे रहेगा। अनुमान है कि इकोनॉमी बढ़ने के साथ सड़क परिवहन कुल माल ढुलाई बाज़ार का करीब 70% हिस्सा बनाए रखेगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को यह देखना होगा कि Tata Motors इन बदलते लॉजिस्टिक्स पैटर्न के हिसाब से अपने प्रोडक्शन और सेल्स मिक्स को कितनी अच्छी तरह ढालती है। जहां रेल की ओर झुकाव से हाई-मार्जिन वाले ट्रैक्टर-ट्रेलर बिज़नेस पर असर पड़ सकता है, वहीं कंपनी की लास्ट-माइल और इंटरमीडिएट ट्रक सेगमेंट की बढ़ती मांग को भुनाने की क्षमता उसके ओवरऑल मार्केट पोजीशन के लिए अहम होगी। निवेशकों को आने वाले तिमाही नतीजों में कमर्शियल व्हीकल कैटेगरी में सेल्स वॉल्यूम के बदलावों पर नज़र रखनी चाहिए।
