लखनऊ प्लांट अब हाइड्रोजन क्रांति का गवाह
Tata Motors ने भारत में सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को एक नया मुकाम दिया है। कंपनी ने अपने लखनऊ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में हाइड्रोजन बसों का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने इसकी घोषणा की, जो कंपनी के उत्सर्जन (Emissions) को कम करने के वादे को दिखाता है। यह इलेक्ट्रिक पॉवरट्रेन के अलावा हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में कंपनी का बड़ा कदम है और भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भी बल देता है।
10 लाख वाहनों का पड़ाव और भविष्य की तैयारी
इस डेवलपमेंट के साथ ही, लखनऊ प्लांट ने 10 लाख (10 Lakh) वाहन बनाने का बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया है। चेयरमैन Chandrasekaran ने बताया कि प्लांट में अगले 10 लाख वाहन अगले 5 साल में बन जाएंगे, जो पिछले 30 साल से भी काफी कम समय है। यह प्लांट का पारंपरिक वाहनों से बदलकर लो-एमिशन पॉवरट्रेन (इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन) के लिए एक एडवांस्ड हब बनने का संकेत है।
ग्रीन पॉवरट्रेन हब की ओर बढ़ता लखनऊ प्लांट
लखनऊ प्लांट, Tata Motors के 2045 तक कमर्शियल व्हीकल्स के लिए 'नेट-जीरो' विजन का एक अहम हिस्सा है। प्लांट डीजल और सीएनजी से हटकर हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक पॉवरट्रेन पर फोकस कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, खासकर एक्सप्रेस-वे, भी लॉजिस्टिक्स में मदद कर रहे हैं। प्लांट का 6MW का सोलर पावर प्लांट और वाटर-पॉजिटिव स्टेटस भी कंपनी के एनवायरनमेंटल लक्ष्यों को सपोर्ट करते हैं।
सरकारी नीति और बाज़ार की दौड़
Tata Motors का यह कदम ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में कंपनी को आगे रखता है। भारत सरकार की नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023 में लॉन्च) का मकसद ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और उपयोग बढ़ाना है। कई कंपनियां जैसे Ashok Leyland और Reliance Industries भी इस क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट कर रही हैं। जहां इलेक्ट्रिक बसों को तेज़ी से अपनाया जा रहा है (लक्ष्य 2030 तक 50,000 बसें), वहीं लंबी दूरी और तेज़ रीफ्यूलिंग के लिए हाइड्रोजन को एक विकल्प माना जा रहा है।
चुनौतियां और निवेशकों की चिंताएं
हालांकि, हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में यह बड़ा कदम निवेशकों की नज़र में है। Tata Motors EV मार्केट में लीडर है (73.1% मार्केट शेयर), लेकिन स्टॉक प्रदर्शन थोड़ा वोलेटाइल रहा है (शुरुआती 2026 में ₹300-400 के बीच)। कुछ एनालिस्ट्स 20.6 के P/E रेशियो को थोड़ा ज़्यादा मानते हैं। हाइड्रोजन के बड़े पैमाने पर अपनाने में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन की ऊंची लागत, रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और स्टोरेज जैसी चुनौतियां हैं। एनालिस्ट्स का नजरिया मिला-जुला है, 'बाय' या 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग्स कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट के लिए आम हैं, टारगेट प्राइस ₹518 से ₹850-1000 तक हैं। हालांकि, आर्थिक दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की चिंताएं बनी हुई हैं।
भविष्य का नज़रिया
लखनऊ प्लांट में हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी की ओर Tata Motors का झुकाव इंडस्ट्री के क्लीनर फ्यूचर में लीड करने की उसकी मंशा दिखाता है। भारत के ग्रीन हाइड्रोजन और EV लक्ष्यों के साथ, Tata Motors दोनों रास्तों पर आगे बढ़ने के लिए अच्छी स्थिति में दिखती है।