चेन्नई MRTS अब चेन्नई मेट्रो का हिस्सा! तमिलनाडु सरकार ने संभाली कमान, ₹4,000 करोड़ का होगा कायाकल्प

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AuthorAditya Rao|Published at:
चेन्नई MRTS अब चेन्नई मेट्रो का हिस्सा! तमिलनाडु सरकार ने संभाली कमान, ₹4,000 करोड़ का होगा कायाकल्प

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई MRTS नेटवर्क को अपने हाथ में लेने के लिए साउथर्न रेलवे और चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इस डील के तहत चेन्नई बीच से सेंट थॉमस माउंट तक के 20 स्टेशन मेट्रो नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे। अगले 24 महीनों में ऑपरेशन्स का ट्रांसफर पूरा हो जाएगा, वहीं सरकार पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज करने और इसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में इंटीग्रेट करने के लिए करीब ₹4,000 करोड़ का भारी निवेश करेगी।

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई में मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) का मालिकाना हक रेलवे से आधिकारिक तौर पर अपने नाम कर लिया है। मंगलवार को साउथर्न रेलवे, राज्य सरकार और चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन हुआ, जिसके तहत चेन्नई बीच से सेंट थॉमस माउंट तक चलने वाले 20 स्टेशनों वाले रेल नेटवर्क का कंट्रोल CMRL को ट्रांसफर किया जाएगा।

दो चरणों में पूरा होगा ट्रांसफर

सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए इस हैंडओवर प्रक्रिया को दो खास चरणों में बांटा गया है। सबसे पहले, 90 दिनों के अंदर MRTS की सभी फिजिकल संपत्तियों का ट्रांसफर पूरा करना होगा। इसके बाद, अगले 24 महीनों की ट्रांजिशन पीरियड में साउथर्न रेलवे रोजमर्रा के ट्रेन ऑपरेशन्स और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभालेगी। इसी दौरान, एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल धीरे-धीरे CMRL को सौंपा जाएगा, जो अंततः पूरे नेटवर्क को शहर के बड़े मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर के हिस्से के रूप में मैनेज करेगी।

₹4,000 करोड़ का मेगा प्लान

राज्य सरकार का मुख्य मकसद इस पुराने MRTS सिस्टम को मॉडर्नाइज करना है। अक्सर इसकी स्टेशन सुविधाओं और कनेक्टिविटी को नए चेन्नई मेट्रो लाइनों के मुकाबले कमतर आंका जाता रहा है। सरकार का अनुमान है कि स्टेशनों को अपग्रेड करने, इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और एक यूनिफाइड सिस्टम बनाने में ₹4,000 करोड़ से लेकर ₹4,200 करोड़ तक का खर्च आएगा। इस मॉडर्नाइजेशन से यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा और एक कॉमन टिकटिंग सिस्टम शुरू किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों को MRTS और मेट्रो के बीच स्विच करना आसान हो जाएगा।

एग्जीक्यूशन रिस्क पर रहेगी नजर

हालांकि, इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की पुरानी समस्याओं को हल करना है, लेकिन इसके कार्यान्वयन (Execution) में कुछ रिस्क भी हैं। खुद हैंडओवर प्रक्रिया में कई प्रशासनिक चुनौतियां रही हैं, जिन पर करीब 15 सालों तक चर्चा के बाद यह फाइनल एग्रीमेंट हुआ है। ऐसे में, निवेशक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखने वाले इस बात पर गौर करेंगे कि फिजिकल संपत्तियों का ट्रांसफर कितनी जल्दी होता है और क्या मॉडर्नाइजेशन का काम मौजूदा यात्री सेवाओं को बाधित किए बिना पूरा किया जा सकेगा। चेन्नई बीच और पार्क टाउन जैसे अहम लोकेशन पर राज्य और रेलवे के बीच जमीन और संपत्तियों को साझा करने की जटिलता भी एक क्रिटिकल मुद्दा है, जिसके लिए क्लोज कोऑर्डिनेशन की जरूरत होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.