तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली है। 2025 में कुल नए रजिस्ट्रेशन में 83% से ज्यादा हिस्सेदारी ई-व्हीकल्स की रही, जबकि जून 2026 तक 116,000 यूनिट्स का आंकड़ा पार हो गया। राज्य मैन्युफैक्चरिंग हब तो बन रहा है, पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कंपनियों पर प्रॉफिट मार्जिन का दबाव निवेशकों के लिए बड़ी चिंताएं हैं।
तमिलनाडु बना इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का गढ़
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की क्रांति में तमिलनाडु एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। राज्य में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का दबदबा साफ दिख रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में कुल नए रजिस्ट्रेशन में इन ई-व्हीकल्स की हिस्सेदारी 83% से अधिक रही। वहीं, जून 2026 तक इनकी बिक्री 116,461 यूनिट्स का आंकड़ा पार कर गई। इसके बाद जुलाई 2026 में भी लगभग 30,000 रजिस्ट्रेशन हुए। चेन्नई, कोयंबटूर और सेलम जैसे बड़े शहरों में ग्राहकों की पसंद तेजी से पेट्रोल-आधारित टू-व्हीलर्स से हटकर इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ रही है।
निवेश का प्रमुख डेस्टिनेशन
ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए तमिलनाडु एक बड़ा इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। 2021 से अब तक राज्य में लगभग ₹12.16 लाख करोड़ का निवेश आया है, जिसमें से 80% प्रोजेक्ट्स पर काम भी शुरू हो चुका है। इस पैसे से मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ी हैं। TVS Motor Company और Ather Energy जैसी बड़ी कंपनियां उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य में अपनी उत्पादन क्षमता का तेजी से विस्तार कर रही हैं। 'Rare Earth Corridors' को बढ़ावा देने और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने की सरकार की योजनाएं इस क्षेत्र को EV एक्सपोर्ट और प्रोडक्शन हब बनाने की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बड़ी चुनौती
ई-व्हीकल्स की इतनी तेज रफ्तार से अपनाए जाने के कारण मौजूदा सपोर्ट सिस्टम पर दबाव आ गया है। पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी एक बड़ी बाधा बनकर उभरी है। 2026 के मध्य तक, राज्य में केवल 1,780 चार्जिंग स्टेशन थे, यानी हर 316 रजिस्टर्ड ई-व्हीकल्स पर लगभग एक पब्लिक चार्जर। यह निर्धारित मानकों से काफी कम है। इस कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने 2031 तक 20,000 स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने में शामिल विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी निवेशकों के लिए भविष्य में इसके विस्तार की गति को धीमा कर सकती है।
निर्माताओं पर प्रॉफिट मार्जिन का दबाव
आर्थिक मोर्चे पर, ई-व्हीकल निर्माता एक मिले-जुले माहौल का सामना कर रहे हैं। मांग तो मजबूत है, लेकिन कंपनियों को अपने प्रॉफिट मार्जिन पर काफी दबाव झेलना पड़ रहा है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर भारी खर्च, सर्विस नेटवर्क स्थापित करने की लागत और मार्केट शेयर हासिल करने की कड़ी प्रतिस्पर्धा अल्पावधि की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा, कुछ निर्माता अपनी मौजूदा उत्पादन सुविधाओं में क्षमता की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे ग्राहकों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है और बिक्री का नुकसान हो रहा है। Ather Energy जैसी कंपनियां शुद्ध घाटे को कम करने के लिए काम कर रही हैं, लेकिन आक्रामक क्षमता विस्तार और स्वस्थ वित्तीय अनुपात बनाए रखने के बीच संतुलन एक प्रमुख कारक होगा जिस पर बाजार की नजर रहेगी। निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की समय-सीमा, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता उपयोग और मार्जिन ट्रेंड्स पर भविष्य के अपडेट पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह उद्योग विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है।
