पर्यावरण और जमीन अधिग्रहण संबंधी विवादों के चलते तमिलनाडु सरकार ने **₹27,400 करोड़** के परांडूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है। अब सरकार ने नए विकल्प के तौर पर मनेलूर और चेय्यूर की पहचान की है और Airports Authority of India (AAI) से फीजिबिलिटी रिपोर्ट मांगी है।
प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर परांडूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से कदम पीछे खींच लिए हैं। पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्थानीय स्तर पर हो रहे भारी विरोध के बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य सरकार ने मनेलूर और चेय्यूर को नए संभावित स्थलों के रूप में चुना है और AAI से तकनीकी सर्वे कराने का अनुरोध किया है।
निवेश और जमीन का क्या होगा?
पुराने परांडूर प्रोजेक्ट के लिए सरकार पहले ही 1,802 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर चुकी थी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹27,400 करोड़ आंकी गई थी। फिलहाल सरकार इस जमीन को इको-फ्रेंडली इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में बदलने पर विचार कर रही है ताकि निवेश को पूरी तरह बर्बाद होने से बचाया जा सके। स्थानीय किसानों के बीच जमीन के मुआवजे और कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर निवेशकों की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
तत्काल क्षमता बढ़ाने पर जोर
नए एयरपोर्ट के निर्माण में देरी को देखते हुए सरकार अब मौजूदा चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके तहत 'टर्मिनल 5' का विकास किया जाएगा, ताकि बढ़ते ट्रैफिक को संभाला जा सके। राज्य का लक्ष्य $1.5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनना है, जिसके लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करना बेहद जरूरी है।
जानकारों का मानना है कि इस देरी का असर लॉन्ग टर्म में औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है, खासकर लॉजिस्टिक्स और एविएशन से जुड़े सेक्टर में। फिलहाल यह मामला राज्य की राजनीति में भी मुख्य मुद्दा बना हुआ है।
