ट्रेन में खाने की सर्विस का बड़ा विस्तार
Swiggy ने अपनी 'Food on Train' सर्विस का दायरा तेजी से बढ़ाया है। पिछले 12 महीनों में कंपनी ने अपने नेटवर्क को 70 स्टेशन से बढ़ाकर 152 स्टेशन कर लिया है, जो कि 117% की भारी बढ़ोतरी है। यह विस्तार खास तौर पर होली के त्योहारी सीजन को देखते हुए किया गया है, जिसमें 28 फरवरी से 8 मार्च 2026 तक ₹399 से ऊपर के ऑर्डर पर फेस्टिव मेन्यू और डिस्काउंट भी शामिल हैं। IRCTC के साथ इस पार्टनरशिप के जरिए Swiggy देश भर के यात्रियों तक पहुंच बना रही है।
हालांकि, Swiggy की इस तेज रफ्तार का असर उसके फाइनेंसियल हेल्थ पर भी पड़ रहा है। दूसरी ओर, सरकारी रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) का मार्केट कैप फिलहाल करीब ₹48,640 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 36.2x (फरवरी 2026 तक) चल रहा है। IRCTC के शेयर में हाल के दिनों में गिरावट देखी गई है, जो फरवरी 2026 के आखिर में करीब ₹605-₹608 के स्तर पर थे। इसका 52-हफ्ते का हाई ₹820 और लो ₹596 रहा है। दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2024 में Swiggy के साथ हुए MoU के बाद IRCTC के शेयरों में 2% की गिरावट दर्ज की गई थी।
संचालन और मुनाफे की चुनौतियाँ
Swiggy का यह आक्रामक विस्तार कंपनी के लिए बड़े ऑपरेशनल और फाइनेंशियल चैलेंज पेश कर रहा है, खासकर Zomato जैसी कंपनियों की तुलना में। फूड डिलीवरी मार्केट में Zomato की हिस्सेदारी 55-58% है, जबकि Swiggy की 42-45%। Zomato अपने फूड डिलीवरी सेगमेंट में बेहतर मुनाफे (positive EBITDA margins) का प्रदर्शन कर रही है। वहीं, Swiggy के फूड डिलीवरी सेगमेंट का EBITDA मार्जिन FY24 में -0.2% रहा, और उसके क्विक कॉमर्स सेगमेंट में भी लगातार घाटा बढ़ रहा है।
Swiggy की वैल्यूएशन $10.7 बिलियन (डेकाकॉर्न) तक पहुंच गई है, लेकिन FY25 में कंपनी ने ₹15,227 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹3,117 करोड़ का भारी नुकसान दर्ज किया। भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट बड़ा है और इसके FY30 तक $25 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन ऐसे में 'यूनिट इकोनॉमिक्स' यानी प्रति ऑर्डर कमाई पर फोकस सबसे अहम हो जाता है। IRCTC के लिए, कैटरिंग से Q3 FY26 में 45.5% रेवेन्यू आया, जबकि इंटरनेट टिकटिंग से 27.5%। इससे पता चलता है कि IRCTC अपनी टिकटिंग मोनोपॉली के सहारे कैटरिंग जैसे कम मार्जिन वाले बिजनेस को संभाल रही है। IRCTC का PE रेश्यो भी इंडस्ट्री के मुकाबले महंगा माना जा रहा है।
जोखिम और प्रतिस्पर्धा का दबाव
Swiggy की 'Food on Train' सर्विस के इस तेजी से विस्तार में कई बड़े ऑपरेशनल रिस्क भी छिपे हैं। ट्रेन से गिरकर डिलीवरी पार्टनर्स के घायल होने जैसे इंसिडेंट्स इस मॉडल के अंतर्निहित खतरों और संभावित देनदारियों पर सवाल उठाते हैं। क्या कंपनी सुरक्षा प्रोटोकॉल का ठीक से पालन कर रही है, या स्पीड के चक्कर में सुरक्षा से समझौता हो रहा है? इस तरह की लॉजिस्टिकल जटिलताएं कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब क्विक कॉमर्स सेगमेंट में नुकसान दोगुना हो गया है।
कहा यह भी जा रहा है कि Swiggy का 'कंट्रीब्यूशन मार्जिन' Zomato से कम है। IRCTC के साथ पार्टनरशिप से पहुंच तो बढ़ी है, लेकिन IRCTC को खुद भी फूड क्वालिटी की शिकायतों (2024-25 में 6,600 से ज्यादा) का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, Zomato से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिसके पास मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन, ज्यादा मार्केट शेयर और ज्यादा एफिशिएंट क्विक कॉमर्स बिजनेस है। Swiggy की $10.7 बिलियन की हाई वैल्यूएशन, लगातार घाटे को देखते हुए, बाजार की धारणा और फाइनेंशियल हकीकत के बीच एक बड़ी खाई दर्शाती है। IRCTC के वैल्यूएशन मेट्रिक्स भी यही संकेत देते हैं कि यह प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।
आगे की राह
भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच यह 14.2% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर $59 बिलियन से भी ज्यादा हो सकता है। रैपिड कॉमर्स इंटीग्रेशन और हाइपर-पर्सनलाइजेशन जैसी इनोवेशंस आगे भी मौके पैदा करेंगी। हालांकि, अब इस सेक्टर का फोकस टिकाऊ 'यूनिट इकोनॉमिक्स' और मुनाफे पर बढ़ता जा रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि एफिशिएंट ऑपरेशन और कॉस्ट मैनेजमेंट ही सफलता की कुंजी होंगे। Swiggy का बढ़ा हुआ नेटवर्क उसकी महत्वाकांक्षा का प्रमाण है, लेकिन इस स्केल को लगातार मुनाफे में बदलने की उसकी क्षमता ही कंपनी के भविष्य और वैल्यूएशन के लिए सबसे अहम साबित होगी।