हवाई यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि प्राइवेट एयरलाइंस के लिए टिकट प्राइसिंग से जुड़े नए नियम **16 नवंबर, 2026** तक फाइनल कर लिए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को प्राइवेट एयरलाइंस के लिए एक स्पष्ट प्राइसिंग फ्रेमवर्क तैयार करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि अब सिर्फ 'सलाह' नहीं चलेगी, बल्कि इसे अनिवार्य नियमों के तहत लागू करना होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी है कि नए गाइडलाइन्स को मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
सलाह से सख्ती तक का सफर
यह कदम लंबे समय से चल रही उस जनहित याचिका का परिणाम है, जिसमें एयरलाइंस द्वारा टिकटों की मनमानी कीमतों पर सवाल उठाए गए थे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने भी स्वीकार किया था कि एयरलाइंस अक्सर अनौपचारिक निर्देशों और फेयर-कैप (Fare Cap) को नजरअंदाज करती रही हैं। कोर्ट का यह हार्ड डेडलाइन यह संकेत देता है कि भविष्य में नियमों का पालन न करने पर सरकार एयरलाइंस को ग्राउंड करने जैसी कड़ी कार्रवाई कर सकती है।
मार्जिन और रेवेन्यू पर असर
निवेशकों के लिए यह एक बड़े रेगुलेटरी रिस्क के रूप में देखा जा रहा है। अब तक भारतीय एयरलाइंस डिमांड बढ़ने पर डायनामिक प्राइसिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाती रही हैं। यदि सरकार अब प्राइस सीलिंग (Price Ceiling) या फिक्स्ड टैरिफ बैंड्स लागू करती है, तो इससे InterGlobe Aviation, Air India, SpiceJet और Akasa Air जैसी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब एयरलाइंस को अधिक पारदर्शी और स्थिर टैरिफ स्ट्रक्चर की ओर बढ़ना होगा, जिससे उनकी रेवेन्यू फ्लैक्सिबिलिटी सीमित हो सकती है।
