सरकारी CESL भारतीय शहरों में 10,900 इलेक्ट्रिक बसों के लिए बड़ा टेंडर लाएगी

TRANSPORTATION
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AuthorWhalesbook News Team|Published at:
सरकारी CESL भारतीय शहरों में 10,900 इलेक्ट्रिक बसों के लिए बड़ा टेंडर लाएगी
Overview

सरकारी कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) 6 नवंबर 2025 को 10,900 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए एक बड़ा टेंडर खोलेगी। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत और अहमदाबाद जैसे शहरों में नेशनल इलेक्ट्रिक बस प्रोग्राम के तहत स्थायी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। टेंडर में एसी और नॉन-एसी मॉडल शामिल हैं और यह ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (Gross Cost Contract) फ्रेमवर्क के माध्यम से खरीद, संचालन और रखरखाव को कवर करता है, जिसमें स्थानीय रोजगार और लैंगिक विविधता पर भी जोर दिया गया है।

एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) अगले महीने 10,900 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण टेंडर लॉन्च करने के लिए तैयार है। यह कदम भारत के नेशनल इलेक्ट्रिक बस प्रोग्राम (NEBP) के लिए एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य शून्य-उत्सर्जन वाले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाना है। 6 नवंबर, 2025 को खुलने वाला यह टेंडर, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों सहित कई शहरों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करेगा। इसमें स्टैंडर्ड फ्लोर, लो फ्लोर और बस रैपिड ट्रांजिट (BRT) मॉडल, दोनों एयर कंडीशनिंग के साथ और बिना, जैसी विभिन्न प्रकार की बसों की खरीद निर्दिष्ट की गई है। सफल बोली लगाने वालों की जिम्मेदारी सिटी ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग्स (City Transport Undertakings) के साथ साझेदारी में इन इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती, संचालन और रखरखाव की होगी। इसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना, स्थानीय ड्राइवरों और रखरखाव कर्मचारियों को काम पर रखना और सख्त सेवा-स्तर समझौतों (SLAs) को पूरा करना शामिल है। यह कार्यक्रम महिला ड्राइवरों और रखरखाव इंजीनियरों को शामिल करने को अनिवार्य करके लैंगिक विविधता को भी प्रोत्साहित करता है। इन बसों से पारंपरिक डीजल बसों को बदलने की उम्मीद है, जिससे अनुमानित रूप से सालाना 4 मिलियन टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। CESL ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) के तहत एक एग्रीगेशन-आधारित खरीद मॉडल का उपयोग करेगी। इस मॉडल में, निजी ऑपरेटर बसों का स्वामित्व और रखरखाव करेंगे, जबकि शहर के अधिकारी प्रति किलोमीटर शुल्क का भुगतान करेंगे। इस मॉडल का उद्देश्य शहरी प्रशासनों के लिए संक्रमण को किफायती बनाना और इलेक्ट्रिक बस अपनाने में तेजी लाना है। प्रभाव
यह खबर भारतीय शेयर बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है, खासकर उन कंपनियों पर जो इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक परिवहन संचालन में शामिल हैं। इस टेंडर का बड़े पैमाने पर होना EV इकोसिस्टम में मांग और निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे भारत का स्वच्छ गतिशीलता की ओर संक्रमण तेज होगा और संबंधित क्षेत्रों को लाभ पहुंचने की संभावना है। NEBP के माध्यम से सरकार की प्रतिबद्धता EV संक्रमण के लिए निरंतर समर्थन का संकेत देती है।
प्रभाव रेटिंग: 8/10।

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