बढ़ती हुई एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों के चलते Star Air ने अपनी साप्ताहिक उड़ानों में **15% से 20%** तक की कटौती कर दी है। ईंधन के बढ़ते खर्चों के दबाव में आई एयरलाइन अब सरकार से प्राइस सपोर्ट मैकेनिज्म की मांग कर रही है।
संजय घोडवाट ग्रुप के तहत संचालित होने वाली रीजनल एयरलाइन Star Air ने अपने नेटवर्क को छोटा करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने अपने बेड़े में मौजूद 8 Embraer विमानों के संचालन को एडजस्ट करते हुए इसे घटाकर अब 52 साप्ताहिक उड़ानों तक सीमित कर दिया है।
क्यों दबाव में है कंपनी?
एयरलाइन के लिए ईंधन का खर्च सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, जो कुल ऑपरेटिंग लागत का लगभग 40% हिस्सा है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। चूंकि रीजनल एयरलाइंस बहुत कम मार्जिन पर काम करती हैं और उनके ग्राहक प्राइस-सेंसिटिव होते हैं, इसलिए टिकट के दाम बढ़ाकर इस खर्च को वसूलना उनके लिए बेहद मुश्किल है।
सरकार से क्या है मांग?
इस संकट से निपटने के लिए एयरलाइन सरकार से 'प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड' (PSF) को फिर से शुरू करने की गुहार लगा रही है। एयरलाइन का तर्क है कि 'Udaan' स्कीम के तहत चलने वाली उड़ानों को एक प्रोटेक्टेड प्राइस कैटेगरी में रखा जाना चाहिए। चूँकि रीजनल ऑपरेटर्स कुल एविएशन फ्यूल खपत का केवल 3% ही उपयोग करते हैं, इसलिए उन्हें सब्सिडी देना सेक्टर की कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए फायदेमंद हो सकता है।
भले ही Star Air एक प्राइवेट कंपनी है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसका यह कदम भारतीय एविएशन सेक्टर की वित्तीय सेहत का एक बड़ा संकेत है। एविएशन सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को अब फ्यूल की कीमतों और सरकारी नीतियों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
