Srinagar EV Market: पैसेंजर कार पीछे, कमर्शियल ऑटो की धूम!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Srinagar EV Market: पैसेंजर कार पीछे, कमर्शियल ऑटो की धूम!

श्रीनगर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का बाज़ार अनोखा रंग दिखा रहा है। जम्मू और कश्मीर में कुल EV रजिस्ट्रेशन में 65% इलेक्ट्रिक तीन-पहिया और ऑटो का दबदबा है, जो इलेक्ट्रिक कार और बाइक को मीलों पीछे छोड़ रहा है। टाटा मोटर्स के पब्लिक इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट सफल रहे हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कड़कड़ाती सर्दी के कारण लोग अभी भी पर्सनल EV लेने से हिचकिचा रहे हैं।

कमर्शियल गाड़ियों का बोलबाला, पैसेंजर कार की खामोशी

श्रीनगर के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट में एक अजीबोगरीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री पर्सनल व्हीकल ओनरशिप से कहीं आगे निकल गई है। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, श्रीनगर में कुल 9,482 EV रजिस्टर हुए हैं, जिनमें से 6,186 यानी 65% तीन-पहिया और ऑटो हैं। यह कमर्शियल गाड़ियों का ज़बरदस्त दबदबा है, जबकि आम खरीदारों में इलेक्ट्रिक कार और बाइक के प्रति दिलचस्पी अभी भी काफी कम है।

सब्सिडी खत्म, अब आगे क्या?

शुरुआत में इलेक्ट्रिक ऑटो की इतनी अच्छी परफॉरमेंस की एक बड़ी वजह राज्य की ओर से मिलने वाली ₹30,000 की सब्सिडी थी, जिसने कमर्शियल सेगमेंट को खूब बढ़ावा दिया। लेकिन अब यह सब्सिडी बंद हो चुकी है, तो सवाल यह है कि भविष्य में इस सेगमेंट का मोमेंटम कैसा रहेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक कारों की बात करें तो साल 2026 में सिर्फ 486 यूनिट्स ही रजिस्टर हुईं। 2023 के 166 यूनिट्स के मुकाबले यह बढ़ोतरी तो है, लेकिन यह आंकड़ा राष्ट्रीय रुझान के सामने बहुत छोटा लगता है। आपको बता दें कि जुलाई 2026 में देश भर में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 73% का सालाना इजाफा हुआ था।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कामयाबी

पर्सनल EV ओनरशिप में भले ही दिक्कतें आ रही हों, लेकिन श्रीनगर में पब्लिक सेक्टर ने 'श्रीनगर स्मार्ट सिटी' प्रोजेक्ट के ज़रिए सफलता हासिल की है। शहर में फिलहाल 100 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिनमें जम्मू और कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की 20 बसें भी शामिल हैं। ये बसें टाटा मोटर्स के साथ एक ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर चल रही हैं। इस मॉडल के तहत, टाटा मोटर्स बसों का संचालन, रखरखाव और चार्जिंग का जिम्मा संभालती है, जबकि ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी सर्विस डिलीवरी का काम देखती है। यह मॉडल शहर के लिए काफी कारगर साबित हुआ है और रोजाना करीब 35,000 यात्रियों को सुविधा दे रहा है। हालांकि, यात्रियों की ओर से कुछ ज़रूरी बदलावों की मांग भी उठी है, जैसे कि पॉकेटमारी जैसी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए अलग सेक्शन की मांग।

मार्केट और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियाँ

श्रीनगर में EV को अपनाने की रफ्तार और राष्ट्रीय बाज़ार के रुझान के बीच का फासला लोकल चुनौतियों के कारण है। चार्जिंग स्टेशनों की कमी जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें खरीदारों को परेशान कर रही हैं। इसके अलावा, घाटी की कड़कड़ाती ठंड बैटरी परफॉरमेंस के लिए एक टेक्निकल चुनौती पेश करती है, जिससे अक्सर खरीदारों के मन में रेंज एंग्जायटी (Range Anxiety) की चिंता बनी रहती है। इन सब वजहों से निवेशक समझ सकते हैं कि श्रीनगर में पर्सनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बाज़ार, भारत के दूसरे बड़े शहरों के मुकाबले पिछड़ा हुआ क्यों है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बढ़ती मांग के साथ तालमेल बिठा पाता है और क्या ऑटो-स्पेसिफिक सब्सिडी खत्म होने के बाद सरकार पर्सनल EV को बढ़ावा देने के लिए कोई नई पॉलिसी लाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.