SpiceJet को मिली राहत! NCLT ने अगली सुनवाई टाली, पर बढ़ाईं मुश्किलें

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AuthorAditya Rao|Published at:
SpiceJet को मिली राहत! NCLT ने अगली सुनवाई टाली, पर बढ़ाईं मुश्किलें

SpiceJet के लिए एक राहत भरी खबर है! नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी के खिलाफ दायर आठ इंसॉल्वेंसी (Insolvency) याचिकाओं पर अपना फैसला 19 और 20 अगस्त 2026 तक टाल दिया है। यह फैसला एक एयरक्राफ्ट लेसर (Aircraft Lessor) के साथ आखिरी वक्त में हुए सेटलमेंट के बाद आया है। हालांकि, यह एक मामले में राहत जरूर है, लेकिन एयरलाइन अभी भी गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है और कई दूसरे लेनदारों के मामले कोर्ट में चल रहे हैं।

NCLT में क्या हुआ?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को SpiceJet के खिलाफ दायर आठ इंसॉल्वेंसी याचिकाओं पर अपना फैसला टाल दिया। यह तब हुआ जब एयरलाइन ने अपने एक एयरक्राफ्ट लेसर, Aviator ML के साथ आखिरी पल में एक सेटलमेंट (Settlement) का ऐलान किया। ट्रिब्यूनल ने इस सेटलमेंट की घोषणा के समय पर नाराजगी जताई, क्योंकि इससे न्यायिक समय बर्बाद हुआ। नतीजतन, कोर्ट ने Aviator ML मामले के लिए आदेश 19 अगस्त 2026 और बाकी सात याचिकाओं के लिए 20 अगस्त 2026 तक स्थगित कर दिए।

वित्तीय और ऑपरेशनल चुनौतियां

यह कानूनी घटनाक्रम एयरलाइन के भारी वित्तीय दबाव के बीच आया है। SpiceJet लगातार घटते बेड़े, कम होती फ्लाइट्स और कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है। साल 2019 में जो डोमेस्टिक मार्केट शेयर लगभग 15% था, वह 2026 के मध्य तक घटकर करीब 3% रह गया है। 2026 के फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों के नतीजों में ₹1,138.15 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दिखा, जो कंपनी के ऑपरेशंस को बनाए रखने में आ रही मुश्किलों को साफ दर्शाता है।

ऑडिटर्स (Auditors) पहले भी कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस पर चिंता जता चुके हैं। इसका मतलब है कि कंपनी की भविष्य में ऑपरेशंस जारी रखने की क्षमता पर संदेह है। एयरलाइन पर लगातार नेगेटिव नेट वर्थ (Negative Net Worth) और भारी कर्ज का बोझ है, जिससे लेसरों और अन्य वेंडरों (Vendors) को भुगतान करना मुश्किल हो गया है।

इंसॉल्वेंसी का खतरा अभी भी बाकी

भले ही Aviator ML के साथ सेटलमेंट ने एक कानूनी लड़ाई को फिलहाल रोक दिया हो, लेकिन कंपनी के लिए इंसॉल्वेंसी का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। NCLT के सामने अभी भी विभिन्न लेसरों द्वारा दायर सात अन्य दिवालियापन याचिकाएं लंबित हैं। ट्रिब्यूनल ने संकेत दिया है कि अगर कोई सेटलमेंट नहीं होता है, तो वह इन मामलों पर आगे बढ़ेगा। कोर्ट की ओर से ज्यादा समय देने की गुंजाइश कम है, खासकर जब ये विवाद जारी हैं और एयरलाइन पर एयरक्राफ्ट लीज पेमेंट्स को लेकर कानूनी दखल का इतिहास रहा है।

जिन लोगों की नजर कंपनी पर है, उनके लिए अगली अहम अपडेट 19 और 20 अगस्त को ट्रिब्यूनल की सुनवाई में मिलेगी। मुख्य बात यह है कि एयरलाइन अपने अन्य लेनदारों के साथ ऐसे ही सेटलमेंट कर पाती है या नहीं, या फिर कोर्ट बाकी लंबित याचिकाओं पर इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.