SpiceJet को कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने अपनी वेबसाइट पर 'डार्क पैटर्न' इस्तेमाल करने पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। कंपनी को अब बुकिंग के दौरान ऑटो-सिलेक्टेड बॉक्स को हटाना होगा, ताकि ग्राहकों की मर्जी का सम्मान हो सके।
कंज्यूमर बॉडी का SpiceJet पर शिकंजा: ₹1 लाख का जुर्माना
Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने एयरलाइन कंपनी SpiceJet पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी अपनी डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' का इस्तेमाल कर रही थी। 'डार्क पैटर्न' यूजर इंटरफेस डिजाइन के ऐसे तरीके होते हैं जो ग्राहकों को अनजाने में या चालाकी से ऐसी चीजें करने के लिए उकसाते हैं, जो वे शायद खुद से न चुनें, जैसे बिना मर्जी के किसी सर्विस के लिए साइन-अप करवाना।
कंज्यूमर की सहमति पर रेगुलेटर का फोकस
CCPA की जांच में पाया गया कि SpiceJet टिकट बुकिंग के दौरान पहले से टिक किए हुए (pre-selected) बॉक्स का इस्तेमाल कर रही थी। इससे ग्राहक अनजाने में ही SpiceClub लॉयल्टी प्रोग्राम और प्रमोशनल मेलिंग लिस्ट में शामिल हो जाते थे। इन ऑप्शन्स को 'ऑन' रखने से कंपनी ग्राहकों से उनकी सक्रिय सहमति लिए बिना ही उन्हें जोड़ रही थी। CCPA के मुताबिक, यह तरीका कंज्यूमर प्रोटेक्शन (E-Commerce) रूल्स 2020 और 2023 के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
शुरुआत में SpiceJet ने इसे 'टेक्निकल एरर' बताया था, लेकिन CCPA ने यह दलील खारिज कर दी। रेगुलेटर ने पाया कि जांच शुरू होने के बाद भी ये तरीके जारी रहे, जिसके बाद जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया। फाइन के अलावा, एयरलाइन को अब अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप से ऐसे प्री-टिक किए हुए सहमति बॉक्स को पूरी तरह से हटाना होगा।
एयरलाइन पर असर और अगले कदम
आर्थिक दंड के अलावा, CCPA ने SpiceJet को 15 दिनों के अंदर एक कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय एविएशन सेक्टर पारदर्शिता, सर्विस क्वालिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को लेकर कड़ी जांच के दायरे में है। शेयरधारकों (shareholders) और निवेशकों के लिए, अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी इन नए डिजिटल नियमों के अनुसार अपने ऑपरेशन्स को कैसे एडजस्ट करती है और कस्टमर डेटा इकट्ठा करने की उसकी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।
उपभोक्ता मामलों की यह संस्था सरकार की उस बड़ी पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत में सभी ई-कॉमर्स और सर्विस-आधारित प्लेटफॉर्म पर सख्त डिजिटल नैतिकता लागू करना है। निवेशक यह भी देखेंगे कि कंपनी अपनी बुकिंग प्रक्रिया में क्या बदलाव लाती है, क्योंकि नियमों के पालन में किसी भी तरह की देरी या परेशानी से अतिरिक्त जांच हो सकती है। ऐसे कॉम्पिटिटिव और कैपिटल-इंटेंसिव एविएशन मार्केट में बने रहने के लिए, कंपनी की यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस बनाए रखने और रेगुलेटरी कंप्लायंस सुनिश्चित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
