SpiceJet के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) की लीजिंग कंपनी ने भारत के एविएशन रेगुलेटर से SpiceJet को लीज पर दिए गए चार Boeing 737 MAX विमानों को डीरजिस्टर करने की मांग की है। यह कदम भारत के नए एयरक्राफ्ट रीपोजिशन नियमों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
ICBC की लीजिंग आर्म ने की कार्रवाई
इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) की दो लीजिंग सब्सिडियरीज ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) में आवेदन किया है। इनमें SpiceJet को लीज पर दिए गए चार Boeing 737 MAX विमानों को डीरजिस्टर करने की गुहार लगाई गई है। यह कदम भारत के एविएशन कानूनों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिन्हें पिछले साल नियमों को आसान बनाने के लिए अपडेट किया गया था, ताकि लीजर्स के लिए विमानों को वापस लेना आसान हो सके, खासकर उन एयरलाइनों से जो लीज की शर्तों को पूरा नहीं कर पाती हैं।
SpiceJet का क्या है कहना?
SpiceJet ने इन विमानों की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ये विमान इंजनों में हाई-प्रेशर टरबाइन की तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से ग्राउंडेड (खड़े) हैं। एयरलाइन के मुताबिक, इन जेट्स को डीरजिस्टर करने का फैसला एक रणनीतिक कदम है, ताकि उन संपत्तियों के लिए लीज रेंटल का वित्तीय बोझ हटाया जा सके जो वर्तमान में कोई राजस्व उत्पन्न नहीं कर रही हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि चूंकि ये विमान पहले से ही सेवा से बाहर हैं, इसलिए इन्हें डीरजिस्टर करने से उनके ऑपरेशनल फ्लाइट शेड्यूल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
वित्तीय और ऑपरेशनल स्थिति
यह कानूनी विकास ऐसे समय में हुआ है जब SpiceJet लगातार भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। एयरलाइन अपनी बैलेंस शीट को स्थिर करने के लिए काम कर रही है और हाल ही में सरकार समर्थित क्रेडिट गारंटी योजना से ₹1.5 अरब का उपयोग किया है। इन उपायों के बावजूद, एयरलाइन को अपने बेड़े (fleet) की उपलब्धता के साथ संघर्ष करना पड़ा है। Planespotters.net जैसे ट्रैकिंग स्रोतों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि एयरलाइन के कुल 53 विमानों में से केवल 11 ही वर्तमान में सक्रिय सेवा में हैं, जो कंपनी की बेड़े प्रबंधन की चुनौतियों के पैमाने को उजागर करता है।
नियामक और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
SpiceJet को पिछले कई महीनों में विभिन्न लीजर्स से भुगतान डिफ़ॉल्ट के कई नोटिस मिले हैं, जो ऋण दायित्वों को प्रबंधित करने में चल रही कठिनाइयों को दर्शाते हैं। भारत में एविएशन सेक्टर अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, जिसमें मार्केट लीडर InterGlobe Aviation (IndiGo) छोटी कंपनियों की तुलना में एक बहुत अलग परिचालन और वित्तीय रास्ते पर है। जहां SpiceJet के शेयर की कीमत साल की शुरुआत से लगभग 63% गिर गई है, वहीं InterGlobe Aviation के शेयरों में 1% की मामूली वृद्धि देखी गई है, जो दोनों वाहकों के बीच निवेशकों की भावना में अंतर को रेखांकित करता है।
निवेशकों को इन डीरजिस्ट्रेशन आवेदनों पर DGCA की प्रतिक्रिया पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसका परिणाम भारत में नए रीपोजिशन कानूनों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है, इसके लिए एक कानूनी मिसाल कायम करेगा। इसके अतिरिक्त, सरकार की योजना से और फंडिंग हासिल करने की एयरलाइन की क्षमता और ग्राउंडेड बेड़े के अधिक विमानों को सेवा में वापस लाने की उसकी प्रगति, कंपनी के दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।
