कैश फ्लो (Cash flow) की गंभीर समस्या के चलते Ministry of Civil Aviation अब SpiceJet पर कड़ी नजर रख रही है। सरकार का मुख्य फोकस यात्रियों की सुरक्षा और फ्लाइट ऑपरेशन्स को सुचारू बनाए रखने पर है।
सरकार की सख्त निगरानी
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ कर दिया है कि मंत्रालय SpiceJet के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार एविएशन रेगुलेटर्स के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि एयरलाइन की फाइनेंशियल अस्थिरता का असर फ्लाइट्स की सुरक्षा पर न पड़े। हालांकि, SpiceJet एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए सरकार की दखलंदाजी की एक सीमा है। मंत्री के अनुसार, कंपनी के सर्वाइवल और वित्तीय सेहत की पूरी जिम्मेदारी मैनेजमेंट की है।
क्यों गहराया संकट?
कंपनी ने हाल ही में Emergency Credit Line Guarantee Scheme के तहत ₹150 करोड़ जुटाए थे, लेकिन इसके बावजूद लिक्विडिटी का संकट खत्म नहीं हुआ है। बढ़ती फ्यूल कॉस्ट (Fuel Cost) और लो-कॉस्ट एयरलाइंस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनी का मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, क्रू मेंबर्स की सैलरी में देरी और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता ने भी कंपनी के ऑपरेशनल स्ट्रगल को बढ़ा दिया है।
मार्केट शेयर में बड़ी गिरावट
साल 2019 में जो कंपनी भारत की दूसरी सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन हुआ करती थी, आज वह अपनी साख बचाने के लिए जूझ रही है। अब एयरलाइन के पास गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। कंपनी को फिर से पटरी पर लौटने के लिए भारी मात्रा में फ्रेश कैपिटल (Fresh Capital) की जरूरत है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या मैनेजमेंट समय रहते फंड जुटाकर कर्ज का बोझ कम कर पाएगा या नहीं।
