क्यों डूबी जा रही है SpiceJet?
SpiceJet इस वक्त गहरे वित्तीय संकट से गुजर रही है, और यह स्थिति लगातार बढ़ते एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों के कारण और भी गंभीर हो गई है। कंपनी का शेयरहोल्डर इक्विटी (Shareholder Equity) लगभग ₹28.0 अरब से काफी नीचे चला गया है, वहीं कुल कर्ज (Total Debt) ₹42.1 अरब तक पहुंच गया है। इस तरह, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) -150.4% हो गया है। कंपनी की कुल लायबिलिटीज़ (Liabilities) ₹86.7 अरब है, जबकि एसेट्स (Assets) केवल ₹58.7 अरब हैं। नतीजतन, कंपनी का ट्रेलिंग पी/ई रेश्यो (Trailing P/E Ratio) -2.30 से -2.41 के बीच है, जो भारी घाटे का संकेत है।
₹144 करोड़ का कानूनी बखेड़ा
एयरलाइन पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन (Kalanithi Maran) और उनकी कंपनी KAL Airways के साथ एक लंबे कानूनी विवाद में फंसी हुई है। इस मामले में कोर्ट ने ₹144.5 करोड़ जमा कराने का आदेश दिया है। SpiceJet ने इस पैसे के बदले अपनी ज़मीन को सिक्योरिटी के तौर पर पेश करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे पहले भी कोर्ट ने ठुकरा दिया था। कंपनी ने कोर्ट से चार हफ़्तों की मोहलत मांगी है।
ऑपरेशनल मुश्किलों का अंबार
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कंपनी की वित्तीय हालत और ऑपरेशनल समस्याओं को देखते हुए इसे "बेहतर निगरानी" (Enhanced Surveillance) में रखा है। ख़बरों के मुताबिक, SpiceJet के पास कुल 56 विमानों में से केवल 21 ही उड़ान भर पा रहे हैं, जिससे इसका मार्केट शेयर घटकर महज 2% रह गया है। कंपनी का इतिहास लिक्विडिटी प्रॉब्लम्स (Liquidity Problems) और विमानों के ग्राउंडिंग (Aircraft Groundings) से भरा पड़ा है, जो इसकी अस्थिरता को दर्शाता है।
इंडस्ट्री पर दबाव
पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष (West Asia Conflict) एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को तेजी से बढ़ा रहा है और उड़ानों में रुकावटें पैदा कर रहा है, जो SpiceJet के करीब 40% रूट को प्रभावित कर रही हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण लंबी दूरी की उड़ानें भरनी पड़ रही हैं, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ गई है।
एनालिस्ट क्या कहते हैं?
विश्लेषकों (Analysts) का SpiceJet के प्रति नजरिया काफी नकारात्मक है। उन्होंने 'Sell' रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट (Price Target) भी काफी नीचे रखे हैं, जो भविष्य में और गिरावट की ओर इशारा करते हैं। कंपनी पर 17.6% तक दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।