सोमालिया के इम्पोर्टर्स ने रेड सी और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता से बचने के लिए सीधे शिपिंग रूट्स का विकल्प चुना है। इसका उद्देश्य माल ढुलाई और इंश्योरेंस के बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाना है, हालांकि समुद्री डकैती (Piracy) का खतरा अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सोमालिया के कारोबारी अब अपनी लॉजिस्टिक्स रणनीति को पूरी तरह बदल रहे हैं। पहले इम्पोर्टर्स अपनी जरूरतों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और सऊदी अरब के हब पर निर्भर थे, लेकिन अब सुरक्षा कारणों से ये पुराने रास्ते काफी महंगे और जोखिम भरे साबित हो रहे हैं। समुद्री इंश्योरेंस के प्रीमियम में आई भारी उछाल ने व्यापारियों को नई राह तलाशने पर मजबूर कर दिया है।
सीधी शिपिंग से महंगाई पर लगाम की कोशिश
बाजार को स्थिर रखने के लिए ट्रेडर्स अब सीधे पोर्ट्स (जैसे मोगादिशू) तक शिपमेंट मंगवा रहे हैं। हाल ही में श्रीलंका से चीनी की एक सीधी खेप इसका बड़ा उदाहरण है। गल्फ के अस्थिर पानी से बचकर सीधे सप्लाई चेन बनाने से जरूरी खाद्य पदार्थों और कंस्ट्रक्शन मटेरियल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
सुरक्षा और समुद्री डकैती का दोहरा संकट
सीधे रास्ते चुनना जितना फायदेमंद दिख रहा है, उतना ही यह खतरनाक भी है। रेड सी संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय नौसेना का ध्यान दूसरी ओर मुड़ गया है, जिसका फायदा उठाकर 2026 में सोमालिया के पास समुद्री डकैती की घटनाएं फिर से बढ़ गई हैं। अब शिपिंग कंपनियों के सामने दोहरी मार है—उत्तर में हूती विद्रोहियों का खतरा और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के पास डकैतों का डर।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इन्वेस्टर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स अब स्थानीय बाजार में कमोडिटी की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर लॉजिस्टिक्स का खर्च इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका सीधा असर महंगाई दर पर पड़ेगा। आने वाले समय में मोगादिशू पोर्ट पर आने वाले माल की मात्रा ही यह तय करेगी कि क्या ये नए डायरेक्ट रूट्स गल्फ हब की जगह ले पाएंगे या नहीं।
