Sikkim Mahananda Express के आरा जंक्शन पर पटरी से उतरने की वजह सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया गया है। रेलवे बोर्ड की चेतावनी के बावजूद बिना सर्टिफिकेशन वाले क्रू को तैनात किया गया, जो रेलवे से जुड़े लिस्टेड PSUs के निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
सुरक्षा नियमों की लापरवाही का खुलासा
आरा जंक्शन पर 7 सितंबर, 2026 को हुई सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस की दुर्घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि ट्रेन के लोको क्रू के पास जरूरी रूट-लर्निंग सर्टिफिकेशन नहीं था। जबकि, 24 अगस्त, 2026 को ही रेलवे बोर्ड ने आसनसोल डिवीजन में हुई पिछली गलतियों के बाद कड़े निर्देश जारी किए थे।
जांच में यह भी पता चला कि प्रयागराज डिवीजन के अधिकारियों ने 'क्रू मैनेजमेंट सिस्टम' को मैनुअली बाईपास किया, जिससे एक अयोग्य टीम को ट्रेन की जिम्मेदारी दी गई। इसके चलते ट्रेन ने रेड सिग्नल को क्रॉस किया और गलत तरीके से रिवर्स करने की कोशिश में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस मामले में लोको पायलट समेत 4 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
निवेशकों की बढ़ सकती है टेंशन
भले ही भारतीय रेलवे एक सरकारी विभाग है, लेकिन इस घटना का असर मार्केट के उन लिस्टेड शेयरों पर पड़ता है जो रेलवे इकोसिस्टम से जुड़े हैं। IRFC, RVNL और IRCTC जैसे स्टॉक्स पहले से ही बाजार में उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं और हाल ही में कई रेलवे शेयरों ने 52-वीक लो के स्तर को छुआ है।
आगे क्या होगा?
हादसे के बाद अब रेलवे में ऑडिट और कंप्लायंस पर सख्ती बढ़ना तय है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सख्त सुरक्षा नियमों के चलते सरकारी प्रोजेक्ट्स की गति पर असर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या सरकार सुरक्षा खर्च बढ़ाएगी या ऑपरेशनल प्रोटोकॉल में कोई बड़ा बदलाव होगा, जो इन कंपनियों के कामकाज की गति को प्रभावित कर सकता है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन की जांच अभी जारी है और बाजार की नजरें सरकारी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
