IPO फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं?
Shreeji Shipping Global Limited के IPO से जुड़े फंड के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आई है। कंपनी के एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, जहाजों (Dry Bulk Carriers) की खरीद के लिए रखे गए ₹2,511.79 मिलियन अभी तक इस्तेमाल नहीं किए गए हैं, जिससे निवेशकों के सवाल खड़े हो गए हैं।
बता दें कि Shreeji Shipping Global Limited ने अपने IPO के ज़रिए कुल ₹4,107.10 मिलियन (₹410.71 करोड़) ग्रॉस फंड जुटाए थे। सभी खर्चों को काटने के बाद, ₹3,695.43 मिलियन (₹369.54 करोड़) नेट प्रोसीड्स के तौर पर कंपनी के पास आए थे।
इस फंड का इस्तेमाल तीन मुख्य कामों के लिए तय किया गया था: ₹2,511.79 मिलियन Dry Bulk Carriers खरीदने के लिए, ₹230.00 मिलियन मौजूदा उधारों (borrowings) को चुकाने के लिए, और ₹953.64 मिलियन जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेज (GCP) के लिए।
पिछली तिमाही में उधारों का भुगतान पूरी तरह से कर दिया गया था। वहीं, जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेज के लिए आवंटित फंड में से ₹951.88 मिलियन का इस्तेमाल हो चुका है, यानी यह लगभग पूरा इस्तेमाल हो चुका है। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता Dry Bulk Carriers की खरीद के लिए रखे गए ₹2,511.79 मिलियन को लेकर है, जिसका इस तिमाही में ज़ीरो परसेंट (0%) इस्तेमाल हुआ है।
कुल मिलाकर, 31 दिसंबर 2025 तक, IPO से जुटाए गए ₹2,519.66 मिलियन अप्रयुक्त पड़े हैं, जिन्हें फिलहाल फिक्स्ड डिपॉज़िट (Fixed Deposit) और बैंक बैलेंस में रखा गया है, जिस पर ब्याज मिल रहा है।
निवेशकों की चिंता जायज़?
निवेशकों का मुख्य सवाल यही है कि कंपनी ने IPO का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी जहाजों की खरीद के लिए रखे ₹2,511.79 मिलियन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? यह कंपनी के मुख्य ग्रोथ प्लान का हिस्सा था, और इसमें ज़ीरो प्रतिशत की प्रगति सवाल उठाती है कि क्या कंपनी अपने ग्रोथ स्ट्रैटेजी को ठीक से लागू (execute) कर पाएगी।
हालांकि, ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह फंड के इस्तेमाल में देरी (delay) का मामला नहीं है, बल्कि एक मामूली GST रिकवरी इश्यू के कारण एक शेयरहोल्डर अकाउंट प्रभावित हुआ था। लेकिन, यह बात मुख्य चिंता को कम नहीं करती कि कंपनी अपने मुख्य एसेट, यानी जहाजों की खरीद में फंड का इस्तेमाल नहीं कर रही है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क (risk) कंपनी की एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी (execution capability) को लेकर है। अगर कंपनी अपने प्रमुख ग्रोथ प्लान के लिए आवंटित फंड को समय पर इस्तेमाल नहीं कर पाती है, तो यह शेयर की वैल्यू पर असर डाल सकता है। आगे आने वाली रिपोर्ट्स में इस पर नज़र रखनी होगी कि कंपनी जहाज खरीदने की दिशा में ठोस कदम उठाती है या नहीं।