लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Shiprocket अपना ₹1,617.48 करोड़ का IPO 12 अगस्त 2026 को खोलेगा, जिसका प्राइस बैंड ₹92-97 प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी का लक्ष्य मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद घाटे को कम करना है। निवेशकों की नजर कंपनी के वैल्यूएशन पर होगी, जो पिछले प्राइवेट फंडिंग राउंड से लगभग 30% कम है।
Shiprocket का IPO जल्द,
ई-कॉमर्स इनेबलमेंट और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Shiprocket अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 12 अगस्त 2026 को लॉन्च करने के लिए तैयार है। कंपनी ने इस ऑफर के लिए ₹92 से ₹97 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू, जिसका लक्ष्य ₹1,617.48 करोड़ जुटाना है, 14 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए बंद हो जाएगा। एंकर निवेशकों के लिए बिडिंग एक दिन पहले होगी।
IPO का स्ट्रक्चर और वैल्यूएशन
कुल इश्यू साइज में ₹885.5 करोड़ का फ्रेश इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ₹731.98 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। ₹97 प्रति शेयर के ऊपरी प्राइस बैंड पर, कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹7,057 करोड़ है। निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि यह वैल्यूएशन दिसंबर 2024 में हुए कंपनी के पिछले प्राइवेट फंडिंग राउंड से लगभग 30% कम है। पब्लिक मार्केट में 'डाउन-राउंड' कहे जाने वाले इस वैल्यूएशन में कमी से पता चलता है कि कंपनी टेक-फोकस्ड लॉजिस्टिक्स फर्मों के लिए मौजूदा मार्केट कंडीशंस के अनुसार अपने वैल्यूएशन को एडजस्ट कर रही है।
वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ
फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, Shiprocket ने ₹2,077.42 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 24% की ग्रोथ दिखाता है। हालांकि, कंपनी फिलहाल मुनाफे में नहीं है। FY26 के लिए इसने ₹79.25 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस रिपोर्ट किया। बॉटम लाइन तक पहुंचने में भले ही कंपनी को समय लगे, लेकिन इसने ऑपरेशनल एफिशिएंसी में प्रगति दिखाई है, जिसमें EBITDA लॉस घटकर ₹16.56 करोड़ रह गया है। इन घटते घाटे को लगातार मुनाफे में बदलने की कंपनी की क्षमता लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए मुख्य फोकस रहेगी।
फंड का इस्तेमाल और जोखिम
कंपनी का इरादा फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रोसीड्स का उपयोग लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए करना है। विशेष रूप से, फंड्स बिजनेस एक्सपेंशन, टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और मार्केटिंग एफर्ट्स के लिए रखे गए हैं। प्रोसीड्स का एक हिस्सा बकाया उधारी के पुनर्भुगतान के लिए भी रखा गया है, जो 31 मार्च 2026 तक ₹242.01 करोड़ थी।
निवेशकों को इस सेक्टर में मौजूद जोखिमों पर विचार करना चाहिए, जिसमें तीव्र प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाए रखने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता शामिल है। जैसे-जैसे कंपनी घाटे में चल रही है, उसकी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखने और प्रति शिपमेंट मार्जिन में सुधार पर निर्भर करती है। स्टॉक के 19 अगस्त 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और एक्सपेंशन प्लान की सफलता से संबंधित भविष्य के अपडेट पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
