Shipping Corporation of India: ₹2,000 करोड़ के मुनाफे का बड़ा लक्ष्य, कंपनी करेगी बेड़े का भारी विस्तार

TRANSPORTATION
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Shipping Corporation of India: ₹2,000 करोड़ के मुनाफे का बड़ा लक्ष्य, कंपनी करेगी बेड़े का भारी विस्तार

Shipping Corporation of India (SCI) ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹2,000 करोड़ से ज्यादा के मुनाफे का लक्ष्य रखा है। पहली तिमाही के शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी अब अपने बेड़े में 85 से ज्यादा नए जहाज शामिल करने की तैयारी कर रही है।

मुनाफे में मजबूती

Shipping Corporation of India (SCI) ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए काफी आक्रामक वित्तीय लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी का लक्ष्य प्रॉफिट आफ्टर टैक्स को ₹2,000 करोड़ के पार ले जाना है। इस भरोसे की वजह पहली तिमाही का प्रदर्शन है, जिसमें कंपनी ने ₹600 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा दर्ज किया था। तुलना करें तो पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का कुल मुनाफा ₹1,326 करोड़ रहा था, जिससे साफ है कि कंपनी की रफ्तार फिलहाल काफी तेज है।

बेड़े में होगा बड़ा बदलाव

अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए SCI एक बड़ा फ्लीट ओवरहाल (Fleet Overhaul) कर रही है। अभी कंपनी के पास 58 जहाज हैं और इसे तेजी से बढ़ाया जाएगा:

  • पेट्रोलियम सेक्टर: तेल कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर के जरिए 34 नए जहाज खरीदे जाएंगे।
  • कंटेनर लॉजिस्टिक्स: Container Corporation of India और चार प्रमुख बंदरगाहों के साथ मिलकर 51 कंटेनर जहाज बेड़े में शामिल किए जाएंगे।

इस कदम का मकसद विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करना और भारत की समुद्री व्यापार में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। इसके लिए सरकार ने ₹10,000 करोड़ की 'कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम' भी शुरू की है।

निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Factors)

हालांकि कंपनी का ग्रोथ प्लान बड़ा है, लेकिन शिपिंग बिजनेस के अपने जोखिम भी हैं:

  1. ग्लोबल उतार-चढ़ाव: ग्लोबल फ्रेट रेट्स में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) सीधे तौर पर मुनाफे को प्रभावित करते हैं।
  2. एक्सिक्यूशन रिस्क: 85 जहाजों को एक साथ मैनेज करना और उनकी खरीद में देरी या लागत का बढ़ना कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डाल सकता है।
  3. डिसइन्वेस्टमेंट का पेंच: कंपनी का रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) अभी भी एक अनिश्चितता बना हुआ है, जिसका असर लॉन्ग टर्म शेयरहोल्डर्स पर पड़ सकता है।

आने वाले समय में कंपनी की फ्लीट इंडक्शन की गति और बंकर फ्यूल की कीमतों पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.