IPO के बाद Shadowfax की पहली तिमाही के नतीजे
लिस्टिंग के बाद Shadowfax Technologies Limited ने अपना पहला फाइनेंशियल रिजल्ट पेश किया है, और इसने निवेशकों को खुश कर दिया है। 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीने की अवधि के नतीजे काफी मजबूत दिखे हैं।
तिमाही नतीजों पर एक नज़र:
- कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) 65.5% की जबरदस्त ग्रोथ के साथ ₹1,159.71 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹700.63 करोड़ था।
- कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Consolidated PAT) में तो 440% की बड़ी छलांग देखी गई, जो ₹34.86 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹6.46 करोड़ था।
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) भी करीब 60.0% बढ़कर ₹1,128.14 करोड़ हो गया।
- स्टैंडअलोन PAT (Standalone PAT) में तो और भी बड़ी 465.8% की तेजी आई और यह ₹36.53 करोड़ पर पहुंच गया।
- कंसोलिडेटेड बेसिक EPS (Earnings Per Share) 393% बढ़कर ₹0.69 हो गया, जो पिछले साल ₹0.14 था।
नौ महीने की परफॉर्मेंस:
- पहली नौ महीनों में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 67.3% बढ़कर ₹2,965.35 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1,772.70 करोड़ था।
- इसी अवधि में कंसोलिडेटेड PAT 243.0% बढ़कर ₹55.89 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹16.29 करोड़ था।
इन नतीजों से पता चलता है कि कंपनी का ऑपरेशनल परफॉर्मेंस काफी मजबूत है और रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले खर्चों को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया गया है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ी है।
अन्य कॉर्पोरेट अपडेट्स:
- IPO की सफलता: कंपनी ने 28 जनवरी 2026 को अपना IPO सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें ₹1,907.27 करोड़ जुटाए गए। शेयर ₹124 के भाव पर इश्यू किए गए थे।
- शेयर कन्वर्जन: सभी क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर (cumulative preference shares) इक्विटी शेयरों में बदल दिए गए हैं।
- सब्सिडियरी में हिस्सेदारी: कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी Criticalog India Private Limited में 10.41% अतिरिक्त हिस्सेदारी ₹5.69 करोड़ में खरीदी है।
- लेबर कोड्स: भारत सरकार द्वारा जारी किए गए चार लेबर कोड्स को कंपनी ने नोट किया है। फिलहाल इनका सीधा असर बड़ा नहीं दिख रहा है, लेकिन कंपनी आगे भी इनका मूल्यांकन करती रहेगी।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों की निगाहें अब Shadowfax Technologies पर टिकी होंगी कि क्या कंपनी IPO के बाद भी अपनी ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रख पाती है। कंपनी के लिए भविष्य में रेवेन्यू और PAT की ग्रोथ को बनाए रखना, Criticalog India के साथ तालमेल बिठाना और लेबर कोड्स जैसे नए रेगुलेशंस के असर को संभालना बड़ी चुनौतियां होंगी।