वंदे भारत एक्सप्रेस का मुश्किल पहाड़ी रास्ते पर टेस्ट, खुलेगा नई रुट्स के द्वार?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
वंदे भारत एक्सप्रेस का मुश्किल पहाड़ी रास्ते पर टेस्ट, खुलेगा नई रुट्स के द्वार?

साउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) ने वेस्टर्न घाट के चुनौतीपूर्ण सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड रूट पर 20-कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के सेफ्टी ट्रायल शुरू कर दिए हैं। यह टेस्ट ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम की क्षमता को परखेगा, जो पहाड़ी इलाकों में हाई-स्पीड ट्रेनों की संभावनाओं को बढ़ाने में एक अहम कदम है।

वंदे भारत की पहाड़ी परीक्षा

साउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) ने वेस्टर्न घाट के सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड जैसे मुश्किल सेक्शन पर वंदे भारत एक्सप्रेस के सेफ्टी ट्रायल शुरू कर दिए हैं। इस ट्रायल का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि क्या सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन देश के सबसे तकनीकी रूप से जटिल रेलवे रूट्स में से एक पर सुरक्षित रूप से चल सकती है।

20-कोच वाली वंदे भारत और उसकी खूबियां

मैसूरु डिविजन द्वारा किए जा रहे इस टेस्ट में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई द्वारा बनाई गई खास 20-कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रायल का एक अहम हिस्सा ट्रेन के ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम का प्रदर्शन है, जो इस घाट सेक्शन में सुरक्षित नेविगेशन के लिए बेहद जरूरी है। यह रूट काफी चुनौतीपूर्ण है, जिसमें 1-इन-50 का ग्रेडिएंट, 57 टनल, 226 ब्रिज और 108 तेज मोड़ शामिल हैं। इन भौगोलिक बाधाओं के कारण, कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने इस सेक्शन पर अधिकतम स्पीड 30 kmph तय की है।

नई राहें खुलेंगी?

बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच सर्विस शुरू करने से पहले इन ट्रायल्स का सफल होना बहुत जरूरी है। हालांकि इस रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा, लेकिन वेस्टर्न घाट की खड़ी चढ़ाई और घुमावदार रास्तों पर हाई-स्पीड ट्रेन के लिए मैदानी इलाकों की तुलना में ज्यादा कड़ी सुरक्षा जांच की जरूरत है। रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) के अधिकारी भी इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं और ट्रेन के ब्रेकिंग परफॉरमेंस, एक्सेलेरेशन और घाट सेक्शन में चढ़ाई-उतराई के दौरान स्थिरता जैसे डेटा पर नजर रख रहे हैं।

रेलवे सप्लाई चेन पर असर

यह ट्रायल पूरे रेलवे इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण हैं। वंदे भारत प्रोजेक्ट में कई घरेलू निर्माता शामिल हैं, जो कोच शेल, पहिए, ब्रेकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स जैसी चीजें सप्लाई करते हैं। यह साबित करना कि वंदे भारत जैसी ट्रेनें वेस्टर्न घाट जैसे मुश्किल पहाड़ी इलाकों में भी चल सकती हैं, रेलवे बोर्ड के लिए देश के अन्य पहाड़ी या पर्वतीय क्षेत्रों में भी ऐसी सेवाएं शुरू करने का रास्ता खोल सकता है। इससे स्पेशलाइज्ड रोलिंग स्टॉक और मेंटेनेंस इक्विपमेंट की मांग भी बढ़ सकती है।

क्या हैं जोखिम?

हालांकि, कुछ ऑपरेशनल जोखिम भी बने हुए हैं। सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड सेक्शन भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और खासकर मानसून के दौरान भूस्खलन का खतरा रहता है, जिससे पहले भी सर्विस बाधित होती रही है। रेलवे सप्लाई चेन के निवेशक अक्सर नई रूट्स की लॉन्चिंग की रफ्तार और वंदे भारत फ्लीट की ऑपरेशनल रिलायबिलिटी पर नजर रखते हैं, क्योंकि ये फैक्टर भविष्य में सरकारी खरीद और टेंडर साइकल को प्रभावित करते हैं। अब सबकी निगाहें RDSO की फाइनल सेफ्टी क्लीयरेंस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस प्रस्तावित सर्विस की कमर्शियल व्यवहार्यता तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.