एयर इंडिया के घाटे ने SIA के मुनाफे को ऐसे किया कम
Singapore Airlines Group ने मार्च 2026 को समाप्त फाइनेंशियल ईयर के लिए S$1.184 बिलियन का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 57.4% कम है। SIA के CEO Goh Choon Phong ने बताया कि एयर इंडिया के इस बड़े घाटे के पीछे सप्लाई चेन की दिक्कतें, मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता और पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने जैसी कई ग्लोबल वजहें थीं। इन वजहों से एयर इंडिया को लंबे और महंगे रूट लेने पड़े। साथ ही, भारतीय रुपये के कमजोर होने से भी लागत बढ़ी है।
SIA की इंडिया पर लंबी अवधि की नजर
फिलहाल कंपनी को एयर इंडिया में निवेश से वित्तीय दबाव झेलना पड़ रहा है, लेकिन SIA इस डील को भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए अहम मान रही है। कंपनी का लक्ष्य सिंगापुर के बाहर निकलकर भारत के विशाल डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयर ट्रैवल मार्केट का हिस्सा बनना है। टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया, 2022 से 14,000 से ज्यादा नए कर्मचारियों को हायर करके बड़े ट्रांसफॉर्मेशन से गुजर रही है। SIA को विश्वास है कि इस स्टेक के जरिए वह भारतीय बाजार में अपनी पैठ मजबूत कर सकेगी, जो दुनिया के सबसे बड़े एविएशन मार्केट्स में से एक बनने वाला है। एयर इंडिया का टारगेट डोमेस्टिक मार्केट में IndiGo के दबदबे को चुनौती देते हुए एक मजबूत इंटरनेशनल प्लेयर बनना है।
मार्केट का रिएक्शन
एयर इंडिया के नुकसान का असर SIA के स्टॉक पर भी दिख रहा है। पिछले एक साल में स्टॉक 8.9% और पिछले एक महीने में 5.0% गिर चुका है। शेयर फिलहाल S$6.30 से S$6.45 के बीच ट्रेड कर रहा है। यह दिखाता है कि निवेशक एयर इंडिया में निवेश से जुड़े जोखिमों को कंपनी के दूसरे ऑपरेशन्स के मुकाबले तौल रहे हैं।
एयर इंडिया और SIA के सामने चुनौतियाँ
एयर इंडिया की मुश्किलें SIA के लिए भी एक बड़ा रिस्क हैं। भले ही पाकिस्तान का एयरस्पेस अब ऊंचे एल्टीट्यूड पर खुल गया है, लेकिन कई फ्लाइट्स को अभी भी लंबे और खर्चीले रूट लेने पड़ रहे हैं। वहीं, मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण फरवरी 2026 के आखिर से जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। SIA ने किराए तो बढ़ाए हैं, लेकिन ये बढ़ोतरी बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट को पूरी तरह से कवर नहीं कर पाई है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। भारत का एविएशन मार्केट भी काफी कॉम्पिटिटिव है, जहां IndiGo का डोमेस्टिक मार्केट पर करीब 63.6% का दबदबा है। लो-कॉस्ट कैरियर्स से इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच सभी प्लेयर्स के लिए प्रॉफिट कमाना मुश्किल हो रहा है। एयर इंडिया के लगातार बड़े घाटे को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह कब तक टर्नअराउंड कर पाएगी, और ग्लोबल अस्थिरता SIA के लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों पर अनिश्चितता का बादल बनाए हुए है।
मैनेजमेंट का नज़रिया: इंडिया स्ट्रैटेजी के लिए धैर्य जरूरी
SIA मैनेजमेंट का मानना है कि आने वाले साल में फ्यूल की बढ़ती कीमतें उनके परफॉरमेंस पर असर डालती रहेंगी, भले ही पैसेंजर डिमांड मजबूत बनी रहे। वे स्वीकार करते हैं कि एयर इंडिया का ट्रांसफॉर्मेशन एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें भारत के एविएशन मार्केट की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए धैर्य और लगातार निवेश की जरूरत होगी।