नेट प्रॉफिट में भारी गिरावट की वजह
Singapore Airlines Group का फाइनेंशियल ईयर 2026 का नेट प्रॉफिट S$1.594 बिलियन घटकर S$1.184 बिलियन रह गया। इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण पिछली बार के एक बड़े नॉन-कैश गेन का न होना है, जो एयर इंडिया- विस्तारा मर्जर पूरा होने पर S$1.098 बिलियन दर्ज किया गया था। इसके अलावा, एसोसिएट कंपनी एयर इंडिया से S$846 मिलियन का भारी घाटा भी कंपनी के नतीजों पर हावी रहा।
रेवेन्यू ने बनाए रिकॉर्ड, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में जोरदार उछाल
ऑपरेशनल फ्रंट पर, Singapore Airlines का प्रदर्शन दमदार रहा। कंपनी का रेवेन्यू 5% बढ़कर रिकॉर्ड S$20.522 बिलियन पर पहुंच गया। यात्रियों की बढ़ी हुई मांग, ज्यादा किराए और फुल फ्लाइट्स की वजह से कंपनी ने रिकॉर्ड 42.4 मिलियन यात्रियों को सफर कराया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 39% का शानदार उछाल देखने को मिला और यह S$2.375 बिलियन पर पहुंच गया।
एयरलाइन सेक्टर में बढ़ती लागतें
फाइनेंशियल ईयर 2026 की शुरुआत में, एशिया के एयरलाइन सेक्टर में यात्रियों की मांग तो मजबूत थी, लेकिन बढ़ती फ्यूल कॉस्ट और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखा गया। अनुमान है कि एशिया पैसिफिक में 2026 में पैसेंजर ट्रैफिक 7.3% बढ़ेगा, लेकिन फ्यूल की कीमतों में उछाल से मार्जिन कम होने की आशंका है। कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियाँ भी लागतों से जूझ रही हैं, जिसमें पायलटों की कमी और बढ़ती मजदूरी का असर भी शामिल है। स्काईट्रैक्स (Skytrax) ने Singapore Airlines को 2026 में दुनिया की दूसरी सबसे अच्छी एयरलाइन का दर्जा दिया है।
एयर इंडिया का निवेश बना चिंता का सबब
Singapore Airlines के लिए एयर इंडिया में किया गया निवेश एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। एयर इंडिया ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में USD 2.4 बिलियन (लगभग SGD 3 बिलियन) से अधिक का नेट लॉस दर्ज किया है। SIA की 25.1% हिस्सेदारी के कारण उसे S$846 मिलियन का घाटा उठाना पड़ा। एनालिस्ट्स का मानना है कि एयर इंडिया को भविष्य में और पूंजी की जरूरत पड़ सकती है, जिससे SIA की फाइनेंसियल पोजीशन पर दबाव आ सकता है। कंपनी का शेयर पिछले एक साल में 8.5% गिर चुका है।
चुनौतियों के बावजूद डिविडेंड का ऐलान
नेट प्रॉफिट में गिरावट और एयर इंडिया को लेकर चिंताओं के बावजूद, Singapore Airlines ने 37 सेंट प्रति शेयर का कुल डिविडेंड प्रस्तावित किया है। यह कंपनी के ऑपरेशनल स्ट्रेंथ पर भरोसे को दर्शाता है। एयर इंडिया में निवेश को कंपनी की लंबी अवधि की मल्टी-हब रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मैनेजमेंट एयर इंडिया को पटरी पर लाने के लिए काम कर रहा है, हालांकि सप्लाई चेन की दिक्कतें और जेट फ्यूल की ऊंची कीमतें अभी भी चुनौतियां पेश कर रही हैं।
