SCR का बड़ा निवेश: माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर फोकस
South Central Railway (SCR) रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) पर ₹13,000 करोड़ से ज्यादा खर्च करने की योजना बना रहा है। यह पिछले साल के ₹11,012 करोड़ के मुकाबले 18.3% की बढ़ोतरी दिखाता है। इस फंड का बड़ा हिस्सा लाइन कैपेसिटी बढ़ाने और ट्रांजिट टाइम को कम करने पर लगाया जाएगा। इसमें नई लाइनों के लिए ₹1,315 करोड़, ट्रैक डबलिंग के लिए ₹5,083 करोड़, और ट्रैक रिन्यूअल के लिए ₹1,908 करोड़ शामिल हैं। साथ ही, ट्रैफिक फैसिलिटीज और सेफ्टी मेजर्स पर भी फोकस रहेगा। SCR का यह बड़ा खर्च कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग कंपनियों जैसे Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) और Ircon International Ltd. के लिए बिजनेस के नए मौके खोल सकता है।
राष्ट्रीय लक्ष्यों को मिलेगा बूस्ट, बजट का भी साथ
SCR की यह निवेश रणनीति देश के माल ढुलाई लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। इंडियन रेलवे का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी 45% हो जाए। इसके लिए बाईपास और नई लाइनों जैसे प्रोजेक्ट्स बहुत जरूरी हैं, ताकि व्यस्त रूट्स पर भीड़ कम हो सके। यूनियन बजट 2026-27 में भी रेलवे के लिए लगभग ₹2.78 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, और कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹2.93 लाख करोड़ तक पहुंचाने की योजना है। यह दिखाता है कि सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रति कितनी गंभीर है। पहले भी, जब रेलवे में कैपिटल स्पेंडिंग बढ़ी है, तो इसका फायदा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिला है। उदाहरण के लिए, Ircon International Ltd. को हाल ही में East Central Railway से ₹1,068 करोड़ का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है, और RVNL को ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम अपग्रेड के डील्स मिले हैं। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद माल की आवाजाही तेज करना है, जिससे भारत की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम हो और इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़े।
प्रोजेक्ट्स में चुनौतियाँ और कंपनियों का वैल्यूएशन
हालांकि, इतने बड़े पब्लिक सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में कुछ मुश्किलें भी आती हैं। रेलवे अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर का 80% से ज्यादा इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन जमीन अधिग्रहण, अप्रूवल या एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस में देरी के कारण प्रोजेक्ट्स अटक सकते हैं। RVNL जैसी कंपनियों के पास बड़े ऑर्डर हैं, लेकिन उनके P/E रेश्यो (मार्च 2026, TTM) 45.23 को देखते हुए, यह लगता है कि भविष्य की ग्रोथ पहले से ही स्टॉक प्राइस में शामिल है। Ircon International Ltd. को भी कुछ एनालिस्ट ओवरवैल्यूड मान रहे हैं। प्रोजेक्ट्स में बजट साइकल या सरकारी जांच का भी असर पड़ सकता है। ग्लोबल लेवल पर भी बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में कॉस्ट बढ़ने और देरी होने का खतरा रहता है। कुछ एनालिस्ट RVNL जैसे शेयरों पर 'अंडरपरफॉर्म' या 'सेल' की सलाह दे रहे हैं, भले ही सरकारी निवेश बढ़ा हो।
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का भविष्य
SCR द्वारा किए जा रहे बड़े निवेश जैसे कदम, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का भविष्य तय करेंगे। नेशनल रेल प्लान 2030 का लक्ष्य एक फ्यूचर-रेडी सिस्टम तैयार करना, ट्रांजिट टाइम कम करना और माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाना है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सरकार का लगातार सपोर्ट और मजबूत ऑर्डर बुक RVNL जैसी कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को बढ़ावा देगा, भले ही नियर-टर्म में कुछ रेवेन्यू की चिंताएं हों। आधुनिकीकरण, कैपेसिटी बढ़ाना, और 'कवच' (Kavach) जैसे सेफ्टी सिस्टम में निवेश, साथ ही इलेक्ट्रिफिकेशन, पूरे रेलवे इकोसिस्टम में डिमांड पैदा करेगा। FY26-27 के लिए यूनियन बजट का बड़ा आवंटन इस पॉजिटिव आउटलुक को और मजबूत करता है, जिसका फायदा कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग, रोलिंग स्टॉक और टेक्नोलॉजी फर्म्स को मिलेगा। इस सेक्टर का भविष्य काफी हद तक सरकारी नीतियों और भारत की ओवरऑल इकोनॉमिक ग्रोथ पर निर्भर करेगा।