हवाई किराए और एक्स्ट्रा चार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट **7 सितंबर 2026** को एक बड़ी सुनवाई करने जा रहा है। नए एविएशन नियमों और फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच निवेशकों की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं।
कोर्ट की सख्ती और मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच निजी एयरलाइंस की प्राइसिंग प्रैक्टिस की जांच करेगी। आरोप है कि एयरलाइंस किराए में मनमानी बढ़ोतरी और मनमाने 'एंसिलरी फीस' (जैसे बैग अलाउंस) के जरिए यात्रियों पर बोझ डाल रही हैं। यह सुनवाई 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024) के तहत नए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के बीच हो रही है। कोर्ट ने पहले ही चेतावनी दी है कि सरकारी नियमों का पालन न करने वाली एयरलाइंस का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए रिस्क (Investor Risk)
एयरलाइन सेक्टर पहले से ही ऑपरेशनल लागत के दबाव में है। 1 सितंबर 2026 को एटीएफ (ATF) की कीमतों में 5.46% का इजाफा हुआ है, जो लगातार दूसरा महीना है जब कीमतें बढ़ी हैं। चूंकि कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35% से 40% हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है, इसलिए यह बढ़ोतरी सीधे मुनाफे (Margin) पर चोट कर रही है।
आगे क्या होगा?
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'प्राइस कैप' (Price Cap) की संभावना है। यदि कोर्ट या सरकार किराए पर ऊपरी सीमा तय करती है, तो एयरलाइंस बढ़ती फ्यूल कॉस्ट को ग्राहकों पर नहीं डाल पाएंगी। आगामी 3 हफ्तों में सरकार द्वारा कोर्ट में ड्राफ्ट रूल्स पेश किए जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट होगा कि डायनामिक प्राइसिंग मॉडल पर सरकार का नियंत्रण कितना सख्त होगा।
