सड़क हादसों में 11.5% का इजाफा: 2025 में 5.14 लाख दुर्घटनाएं, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे

TRANSPORTATION
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
सड़क हादसों में 11.5% का इजाफा: 2025 में 5.14 लाख दुर्घटनाएं, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे

साल 2025 में भारत में सड़क हादसों की संख्या में चिंताजनक 11.5% का इजाफा हुआ है। देश भर में कुल **5.14 लाख** रोड एक्सीडेंट दर्ज किए गए। इनमें से सबसे ज्यादा हादसे तमिलनाडु में हुए, जबकि मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। यह आंकड़ा देश के लिए सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की दक्षता को लेकर एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

Detailed Coverage

हादसों के आंकड़ों में बड़ा उछाल

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश में सड़क सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर, रिपोर्ट किए गए सड़क हादसों की कुल संख्या बढ़कर 5.14 लाख हो गई है, जो 2022 के 4.61 लाख के आंकड़े से एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। इसी अवधि में, कुल मौतों की संख्या 8.7% बढ़कर 1.83 लाख हो गई।

राज्यों की सुरक्षा प्रोफाइल में अंतर

देश के दो सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों - तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश - के सुरक्षा प्रोफाइल में बड़ा अंतर देखने को मिला है।

  • तमिलनाडु: इस राज्य में देश भर में सबसे अधिक 71,387 हादसे दर्ज किए गए। हालांकि, यहां 18,505 मौतें हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां छोटी-मोटी घटनाओं को भी रिपोर्ट करने की बेहतर व्यवस्था और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता प्रणाली (post-crash medical response systems) बेहतर हो सकती है, जिससे प्रति दुर्घटना मृत्यु दर कम है।
  • उत्तर प्रदेश: यहां 49,671 हादसे हुए, जो तमिलनाडु से काफी कम हैं। लेकिन, राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा 27,550 लोगों की मौत हुई। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में होने वाली दुर्घटनाएं अधिक घातक साबित हो रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि तेज रफ्तार से होने वाली टक्करें, हाईवे इंजीनियरिंग की समस्याएं या दुर्घटना के बाद तुरंत मिलने वाली ट्रॉमा केयर (trauma care) की कमी इसके कारण हो सकते हैं।

नीतिगत चुनौतियाँ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

देश भर में बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और वाहनों की बढ़ती संख्या, मौजूदा सड़क सुरक्षा उपायों पर भारी पड़ रही है। तमिलनाडु जैसे राज्यों के लिए, नीति का फोकस ट्रैफिक मैनेजमेंट और व्यवहार संबंधी नियमों के सख्त प्रवर्तन पर होना चाहिए ताकि हादसों की कुल संख्या कम हो सके। वहीं, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को हाईवे डिजाइन में सुधार, खतरनाक मार्गों पर गति नियंत्रण और आपातकालीन ट्रॉमा सेवाओं को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।

जैसे-जैसे वाहनों का स्वामित्व बढ़ रहा है और देश भर में हाईवे का विस्तार हो रहा है, सड़क सुरक्षा राज्य सरकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई है। आने वाले समय में, सरकारी आवंटन सड़क सुरक्षा तकनीक, जैसे ऑटोमेटेड ट्रैफिक एनफोर्समेंट सिस्टम और ट्रॉमा केयर सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये आंकड़े नियंत्रण के लिए केंद्रीय होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.