हूती विद्रोही हमलों के कारण किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को **17 अक्टूबर 2026** तक बंद कर दिया गया है। सऊदी अरब में **46.4%** उड़ानें रद्द होने से एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन और इंश्योरेंस प्रीमियम पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती बलों के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ऑपरेशंस को 17 अक्टूबर 2026, 21:00 GMT तक सस्पेंड कर दिया गया है। यह घटना सऊदी एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि हमलों से बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है और सुरक्षा कारणों से अथॉरिटीज ने पूरी तरह काम रोक दिया है।
एविएशन सेक्टर में हाहाकार
एनालिटिक्स फर्म Cirium के डेटा के मुताबिक, पूरे सऊदी अरब में 46.4% उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। ग्लोबल एयरलाइंस ने अपनी रणनीति बदली है:
- Lufthansa: 16 अक्टूबर तक रियाद के लिए सभी उड़ानें ग्राउंड कीं।
- Air France-KLM: महीने के अंत तक सर्विस रोकी।
- Delta Air Lines: अटलांटा-रियाद रूट की लॉन्चिंग अब मार्च 2027 तक टाल दी गई है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Alert)
यह केवल उड़ानों के रद्द होने तक सीमित नहीं है। एयरलाइंस को अब मध्य पूर्व के दक्षिणी गलियारे से बचने के लिए सेंट्रल एशिया के लंबे रूट अपनाने पड़ रहे हैं। इससे फ्यूल कंजम्पशन और क्रू रोटेशन की लागत बढ़ रही है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के क्वार्टरली प्रॉफिट को चोट पहुंचाएगी।
अमेरिकी रेगुलेटर FAA ने सऊदी एयरस्पेस के लिए 10 दिसंबर 2026 तक सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी की है। इस अनिश्चितता के कारण 'वॉर एंड टेररिज्म' इंश्योरेंस प्रीमियम में बड़ी बढ़ोतरी तय है, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ जाएगी। निवेशक अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या 'Vision 2030' के तहत टूरिज्म और कनेक्टिविटी के लक्ष्यों पर कोई दीर्घकालिक असर पड़ेगा, क्योंकि सुरक्षा का यह माहौल एयरलाइंस की कैपेसिटी प्लानिंग को प्रभावित कर रहा है।
